विदिशा। कोविड संकट और लॉकडाउन के बीच मिड-डे मील को जारी रखने के मामले में कई राज्यों की ढिलाई और जरूरी तैयारियों का अभाव करीब तीन महीने पहले ही दिख चुका था, जब सुप्रीम कोर्ट ने 18 मार्च को सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से नोटिस जारी कर पूछा कि स्कूल बंद कर दिए जाने के बाद वे अपने यहां मिड-डे मील योजना क्यों नहीं जारी रख पा रहे हैं और अगर जारी रखेंगे तो किस सूरत में.
आनन फानन में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 20 मार्च को सभी राज्यों को भेजे गए निर्देश में ये स्पष्ट किया था कि लॉकडाउन के बावजूद सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना चलती रहनी चाहिए. इसके तहत बच्चों को राशन या भत्ता मिलना चाहिए. लेकिन जमीनी स्तर पर ये योजना अब दम तोड़ती नजर आ रही है.
विदिशा जिले में मिड-डे-मील वितरण की हालत जानने के लिए ईटीवी भारत की टीम विदिशा शहर के जात्रापुरा इलाके में पहुंची और स्थानीय लोगों से बात की. इस दौरान महेंद्र अहिरवार ने बताया कि अब उनके बच्चों को मिड-डे-मील नहीं मिल रहा है. लॉकडाउन की शुरूआत में कुछ दिनों जरूर उनके बच्चों को खाना दिया गया था.
पिंकी का भी यही कहना है कि बच्चों को मिड-डे-मील नहीं मिलने से बड़ी परेशानी हो रही है. न कोई आमदनी है और न कहीं काम मिल रहा है. ऐसे में बच्चों को एक टाइम तो स्कूल में पोषण आहार मिल जाता था, लेकिन अब तो वो भी नसीब नहीं हो पा रहा है.