उमरिया।भले हीकेंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार दिव्यांगों के लिए कई योजनाएं चला रही हो लेकिन आज भी मध्यप्रदेश के उमिरया जिले में दिव्यांगों को मूलभूत सुविधाएं भी नसीब नहीं हो पाई है. जिले में 15 हजार से ज्यादा दिव्यांग आज भी परेशानियों से जूझ रहे हैं. इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद इनकी परेशानी को समझने और उन्हें जरूरी सहयोग देने में सरकार और समाज दोनों नाकाम दिखाई दे रही हैं. देश में हुए एक सर्वे से सामने आया है कि अधिकांश सार्वजनिक स्थलों पर सुविधाओं के लिहाज से दिव्यांगों का जीवन किसी चुनौती से कम नहीं है.
प्रमाण पत्र बनवाने में छूट जाते हैं पसीने
दिव्यांग पूरन चौधरी बताते हैं कि विकलांगता प्रमाण पत्र बनाने के लिए उन्हें कई महीने तक कार्यालय के चक्कर काटने पड़े थे. तब जाकर प्रमाण पत्र हासिल हुआ था. इस दौरान उन्हे कई दर्द से भी गुजरना पड़ा.
दृष्टि बाधित, श्रवण बाधितों के लिए नहीं है कोई व्यवस्था
मेडिकल बोर्ड मे सिर्फ हाथ पैर से संबंधित दिव्यांगों का प्रमाण पत्र देने वाले स्पेशलिस्ट ही उपलब्ध हैं. दृष्टि और श्रवण बाधित दिव्यांगों के लिए जिले में कोई व्यवस्था नहीं हैं. बोर्ड उन्हे संभागीय मुख्यालय से स्थित चिकित्सालय में रेफर कर कर देता है. ऐसे में आर्थिक तंगी झेल रहे दिव्यांगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. क्योंकि एक बार में जाने से काम नहीं होता. जिस वजह से उन्हें दो से तीन बार जाना पड़ता है.
ये भी पढे़ं :दिव्यांग दिवस: सत्येंद्र बना पहला एशियाई दिव्यांग पैरा स्वीमर, कई अवॉर्ड किए अपने नाम
शारीरिक रूप से दिव्यांगों को साधनों का आभाव
दिव्यांग पूरन चौधरी ने बताया की साधन के अभाव में वह कही जाकर मेहनत मजदूरी भी नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में अगर सरकार की तरफ से स्वचालित वाहन मिल जाये तो वह मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण सकते है.