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जान लेने वाली AK-47 राइफल नहीं, ये है जिंदगी बचाने वाली 'AK-47 साइकल' - शहडोल न्यूज

कोरोना काल में अपने आप को फिट रखने के लिए लोग साइकिल का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. शहडोल में दो दोस्तों ने इंटरनेट पर एक साइकिल देखी, लेकिन जब इस साइकिल का ऑनलाइन रेट पूछा तो वह काफी महंगी मिल रही थी. लिहाजा जिसके बाद दोनों दोस्तों ने खुद ही इस साइकिल को बनाने की ठानी ली और यूट्यूब से सीखकर AK-47 साइकिल बना दी.

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Published : Oct 10, 2020, 10:39 AM IST

शहडोल। दिखने में भारी भरकम ये साइकिल आजकल सुर्खियों में है. यह साइकिल शहडोल शहर में जहां से भी गुजरती है, लोग बस उसे देखते ही रहते हैं और यही पूछते हैं कि कहां से खरीदी. अलग सा मॉडल का दिखने वाली ये साइकिल लोगों को खूब पसंद आ रही है. आपको जानकर हैरानी होगी महंगी दिखने वाली यह साइकिल किसी बड़े दुकान से नहीं खरीदी गई. बल्कि इसे दो दोस्तों ने मिलकर तैयार किया है.

दो दोस्तों मे मिलकर तैयार की अनोखी सायकल

ऐसे तैयार हुई यह अनोखी साइकिल

साइकिल को तैयार करने वाले अमन विश्वकर्मा का कहना है वे और उनका दोस्त प्रभात शुक्ला ने लॉकडाउन के दौरान यूट्यूब पर एक साइकिल देखी थी. जिसका रेट पता करने पर वह काफी महंगी मिल रही थी. लिहाजा हम दोनों ने ठाना कि अब कुछ इसी तरह की फिजिकल ट्रेनिंग के लिए फायदेमंद साइकिल वह खुद ही तैयार करेंगे. फिर क्या था लॉकडाउन के दौरान ही दोनों दोस्तों ने इस पर काम शुरू कर दिया और कुछ ही महीनों में यह स्पेशल साइकिल तैयार हो गयी. जिसे इन दोनों दोस्तों ने AK-47 नाम दिया है. यानि एके-47 राइफल नहीं बल्कि एके-47 साइकल.

अमन विश्वकर्मा का कहना है कि दोनों दोस्तों ने मिलकर इसके लिए सामान इकट्ठा करना शुरू किया और फिर क्या था थोड़ी मेहनत जरूर लगी, लेकिन 2 महीने में ये साइकिल बनकर तैयार हो गई. साइकिल में दोनों टायर कार के लगाए गए हैं, इसके अलावा अपाचे बाइक की पावर ब्रेक लगाई गई है. इस सबको मिलाकर साइकिल को तैयार करने में 16 से 17 हजार रुपए का खर्चा आया है.

बॉडी फिटनेस के लिए परफेक्ट है यह साइकिल

पंडित शंभूनाथ शुक्ल यूनिवर्सिटी के फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स विभाग के एचओडी डॉ. आदर्श तिवारी भी इस साइकिल की खूब तारीफ कर रहे हैं. उनका कहना है कि साइकिल को बनाने में काफी हेवी मटेरियल का इस्तेमाल किया गया है. जिसे चलाने से हमारे शरीर का इंडोरेंस को डेवलप होगा. इंडोरेंस हमारे फिजिकल के लिए जरुरी कंटेंट होता है. उनका कहना है कि इस साइकिल को चलाने से हमारे थाई के मसल्स के साथ ही बैक साइड के मसल्स हैं और सोल्डर के मसल्स में स्ट्रैंथ डेवलप होगी. साथ ही शरीर में इलास्टिसिटी आएगी और कैपेसिटी डेवलप होगी. उनका कहना है कि आने वाले समय में आप देखेंगे कि यह साइकिल जिम की एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा हो जाएगी.

प्रोफेसर आदर्श तिवारी का कहना है कि इस साइकिल के हैंड्स को पकड़ने के लिए शरीर को एक विशेष एंगल पर झुकना पड़ता है. जिससे शोल्डर के जो मसल्स हैं उनकी स्ट्रैंथ बढ़ाएंगे. हमारा शोल्डर भी काफी मजबूत होगा. वहीं पीठ की जितनी भी मांसपेशियां हैं उनमें जब को-ऑर्डिनेटिव तरीके से साइकिल की पैडल मारेंगे तो आप देखेंगे बहुत अच्छी तरह से एक्सरसाइज होगी और व्यक्ति या खिलाड़ी का एंडोरेंस बहुत अच्छा होगा. कुल मिलाकर फिजिकल ट्रेनिंग के लिए यह सायकल बहुत ही शानदार है.

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