शहडोल। हर साल गर्मी के सीजन में जहां आम आदमी को सब्जी खरीदने से पहले अपने पर्स में झांकना पड़ता था, वहीं इस साल सब्जी किसानों को जीवनयापन करने के लिए अपने पर्स में झांकना पड़ रहा है. जून का महीना चल रहा है और इस महीने हर साल सब्जियों के दाम आसमान पर रहते थे. भीषण गर्मी की वजह से हर साल सब्जी का उत्पादन घट जाता था और बाजार में माल कम हो जाता था, जिस वजह से मंडी में सब्जियों की आवक कम होती थी और उनके दाम काफी बढ़े रहते थे. लेकिन मौजूदा साल ऐसा नहीं है, इस साल सब्जियों के दाम पिछ्ले साल की अपेक्षा बहुत कम हैं. आखिर क्या है वो वजह जो सब्जियों के दाम इतने कम हैं, पढ़ें पूरी रिपोर्ट-
ठेले में रखी ये हरी-हरी सब्जियां देखकर आपका मन भी इन्हें लेने का कर रहा होगा. इस साल सब्जी लेने से पहले आपको अपने पर्स में भी झांकने की जरुरत नहीं है, क्योंकि हर साल आसमान को छूने वाले इन सब्जियों के भाव इस साल इतने सस्ते हैं कि किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं.
सस्ती बिक रही सब्जी, ग्राहक की कमी
बता दें, हर साल की तुलना में इस साल सब्जियों की आवक फिलहाल एकदम से ज्यादा हो गई है. लॉकडाउन के कारण अभी तक सभी मंडिया थीं, लेकिन अनलॉक होते ही सभी किसान ज्यादा मात्रा में सब्जी लेकर मंडी पहुंच रहे हैं. इस वजह से इस साल सब्जियां की आवक ज्यादा हो गई है. वहीं कोरोना काल के कारण लोग ज्यादा बाहर नहीं आ रहे हैं और न हीं सब्जियां खरीद रहे हैं. जिस वजह से इस साल कौड़ियों के दाम पर भी सब्जियां नहीं बिक रही हैं.
10 रुपए किलो बिक रहे टमाटर-बैंगन-लौकी
फुटकर सब्जी व्यापारी दशरद पाटदर ने बताया कि इस साल ग्राहकों के नहीं आने और सब्जियों की ज्यादा आवक होने से सब्जियां सस्ती हैं. करेला महज 20 रुपए किलो, गिलकी 20 रुपए किलो, परवल 40 रुपए किलो, कद्दू 10 से 15 रुपए किलो, लौकी, टमाटर, बैंगन सब 10 रुपए किलो बिक रहा है. बीते साल इसी समय इन्हीं सब्जियों के दाम जितने अभी हैं उससे दोगुने हैं.
आवक ज्यादा, क्रय शक्ति कम
सब्जियों के थोक व्यापारी बताते हैं कि इस सीजन में सब्जियों के दाम कम होने की वजह है अभी लोगों के पास खरीदने की क्षमता नहीं हैं. दूसरे माल का प्रोडक्शन तो हुआ है लेकिन दुकानें उतनी नहीं लग रहीं. दुकानें ज्यादा न लगने की वजह से माल सबके पास पड़ा है. वहीं लोगों के पास पैसे नहीं है, मजदूर भी बाहर नहीं निकल रहे हैं, जिस वजह से खरीददारी नहीं हो रही हैं. एक तरह से कहें तो सब्जी की सप्लाई ज्यादा है लेकिन डिमांड कम है जिसके चलते दाम भी कम हैं.
किसान लाचार, कुछ फेंक रहा, कुछ बेंच रहा
किसान मोहन पटेल कई साल से सब्जी की खेती करते आ रहे हैं. वे 15 से 20 एकड़ जमीन में सब्जी की खेती करते हैं और बाजार में बेचते हैं, लेकिन इस साल उन्हें बहुत नुकसान हुआ है. मई-जून में ज्यादा सब्जी की खेती इसलिए करते हैं क्योंकि इस सीजन में सब्जियों के दाम ज्यादा होते हैं, जिससे कमाई ज्यादा होती है. लेकिन इस साल सब्जी किसानों को नुकसान ही नुकसान हुआ है.