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राज्य दर राज्य बिकती रही बिहार की नाबालिग, तीन साल बाद एमपी के मुरैना से बरामद

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Published : Dec 8, 2019, 8:07 AM IST

औरंगाबाद की एक नाबालिग लड़की को तीन साल बाद पुलिस ने बरामद किया, जोकि अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह की शिकार बन गई थी.

Human trafficking case
मानव तस्करी का मामला

औरंगाबाद/मुरैना।तीन साल पहले लापता हुई नाबालिग लड़की को मध्यप्रदेश के मुरैना से बरामद किया गया है. मध्यप्रदेश में राघवेंद्र प्रसाद की पत्नी के रूप में पीड़िता नेहा देवी (बदला हुआ नाम) को बरामद किया गया, जहां उसे बंधक बनाकर रखा गया था. पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपी राघवेंद्र शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया.

तीन साल बाद नाबालिग बरामद

क्या है पूरा मामला?
पीड़िता नेहा देवी (बदला हुआ नाम) 3 साल पहले 14 साल की उम्र में अपने औरंगाबाद आवास से रूठकर भाग गई थी. इस दौरान उर्मिला नाम की महिला उसे बहला-फुसलाकर आगरा ले गई. वहां पहुंचने के बाद उर्मिला ने 30 हजार रुपये में पीड़िता को राजस्थान के राजू नाम के व्यक्ति को बेच दिया. राजू ने पीड़िता को 40 हजार रुपये में मध्यप्रदेश के मुरैना जिला निवासी मुन्नालाल शर्मा को बेच दिया. मुन्ना ने उसे अपने साले राघवेंद्र शर्मा को सौंप दिया, जो उसी जिले के अम्बाह थाना क्षेत्र का निवासी है. राघवेंद्र ने लड़की का जाली आधार कार्ड बनवाया, जिसमें पीड़िता को भी अम्बाह निवासी और अपनी पत्नी बना दिया.

3 साल बाद हुई पीड़िता बरामद
इस घटना के 3 साल बीत जाने के बाद मामले का खुलासा हुआ और इस घटनाक्रम के सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इस मामले पर एसडीपीओ राजकुमार तिवारी ने बताया कि एएसआई दिनेश पासवान के नेतृत्व में 2 महिला सिपाही और चौकीदार की एक टीम तैयार कर मध्यप्रदेश के अम्बाह थाना क्षेत्र में भेजा गया. वहां स्थानीय थाना के सहयोग से पीड़िता को मुक्त कराया गया. साथ ही पुलिस कार्रवाई करते हुए राघवेंद्र शर्मा, मुन्नालाल शर्मा को गिरफ्तार कर बिहार ले आई. मुन्नालाल शर्मा के पास से एक पिस्तौल और 3 कारतूस बरामद किया गया.

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कार्रवाई में जुटी पुलिस
एसडीपीओ ने बताया कि इस मामले में अंतर्रराज्यीय मानव तस्करी के 6 लोगों की एक श्रृंखला का उद्भेदन हुआ है. सभी अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए रफीगंज पुलिस निरीक्षक के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया जा रहा है, जो आगे की कार्रवाई करेगी. वहीं, पीड़िता के बयान को न्यायालय में दर्ज कराए जाने की प्रक्रिया भी जारी है. साथ ही अनुसंधान में मध्यप्रदेश गई पुलिस टीम के सदस्यों को पुरस्कृत करने को लेकर भी अनुशंसा की जा रही है.

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