मंदसौर। एक ओर प्रदेश में यूरिया संकट पर सियासत थमने का नाम नहीं ले रहा है, जबकि हकीकत में किसान यूरिया संकट से दो चार हो रहे हैं. मंदसौर में किसान यूरिया के लिए घण्टों लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार इस उम्मीद से कर रहे हैं कि उसे यूरिया मिल जाएगा, लेकिन उसे बिना यूरिया के ही खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.
यूरिया के लिए घंटों लाइन में खड़े किसान, फिर भी लौट रहे खाली हाथ - Farmers standing in long line
मंदसौर में किसान यूरिया के लिए घण्टों लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार इस उम्मीद में कर रहे हैं कि उसे यूरिया मिल जाएगा, लेकिन उसे बिना यूरिया के ही खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.
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रबी के सीजन के शुरुआती दौर में ही खाद की किल्लत हो गई है, इस साल जिले में करीब 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं और चने की बोवनी हुई है. जिसके लिए किसानों को यूरिया की जरुरत है, लेकिन एक महीने से खाद की कमी बनी हुई है. खाद की सप्लाई ठीक से नहीं होने के चलते प्रशासन खाद उपलब्ध नहीं करा पा रहा है.
आलम ये है कि किसानों की पावती बुक और आधार कार्ड की फोटो कॉपी के आधार पर 2-2 बैग प्रति किसान ही दिया जा रहा है. यूरिया लेने के लिए लोग सुबह से ही वितरण केंद्र के काउंटर पर लाइन में लगते हैं. यूरिया के लिए यहां महिलाएं और पुरुषों की लाइनें भी लग रही हैं. वितरण अधिकारी भी ये मानकर चल रहे हैं कि खाद की कमी के चलते वितरण केंद्र के सभी कर्मचारी और अधिकारी भी परेशान हैं.