इंदौर।डीसीपी आदित्य मिश्रा के अनुसार इस शातिर गिरोह में अभी तक आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है. जिसमें दो महिलाएं हैं. इनमें से कुछ लोग इंदौर के हैं. बाकी सभी प्रदेश के अन्य जिलों से हैं. गिरोह का मुख्य सरगना दीपक कुमार जैन निवासी होशंगाबाद बताया जा रहा है. दीपक ही मास्टरमाइंड है, जो क्रेडिट हिस्ट्री सैलरी अकाउंट से लेकर सभी दस्तावेजों को तैयार करता था. फर्जी लोन मामले में दीपक द्वारा तैयार किए गए दस्तावेजों के आधार पर ही बैंक से लोन मंजूर होता था.
बैंक की हो सकती है मिलीभगत :बेहतर सिविल स्कोर के बिना बैंक किसी भी व्यक्ति को लोन नहीं देती है. इसी का फायदा उठाकर गिरोह के सभी सदस्य अपनी फीस के रूप में लोन अमाउंट का 25% लेते थे. पुलिस द्वारा यह भी शंका जताई जा रही है कि इस फर्जी लोन मामले में बैंक अधिकारियों कर्मचारियों की भी मिलीभगत हो सकती है. साथ ही बैंक में लगने वाले डॉक्यूमेंट फर्जी तरीके से तैयार किए जाते थे. डीसीपी आदित्य मिश्रा का कहना है कि अगर एसबीआई या अन्य शासकीय बैंकों के कर्मचारी अधिकारी इसमें लिप्त हुए तो उन पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.