होशंगाबाद। बिहार के सुपर- 30 के आनंद कुमार की तरह मध्यप्रदेश में भी अन्ना सर है, जोकि आनंद सर की तरह ही गरीब तबके के बच्चों को पढ़ाते हैं, जो अब तक 1 हजार के गरीब बच्चों को सरकारी नौकरी दिला चुके है. आंध्र प्रदेश राज्य के रहने वाले राम मंगलम, जिन्हें लोग अन्ना सर के नाम से पुकारते हैं. अन्ना रेलवे फैक्ट्री में काम करने के लिए 2008 में इटारसी आए और यहीं से उन्होंने नौकरी के साथ लोगों की जिंदगी बदलने का उद्देश लेकर काम शुरू कर दिया.
अन्ना सर हजारों बच्चों की बदल चुके हैं किस्मत अन्ना सर ने बताया कि 2009 से इटारसी में रेल्वे के इंजन की रिपेरिंग काम कर रहे है. नौकरी के साथ कोचिंग की शुरुआत की थी, तब उनके पास केवल एक लड़का पढ़ने के लिये आता था. उन्होंने खुद ही गरीब बच्चों को पढ़ने के लिये बुलाया, जिनसे मात्र 50 रुपये लेकर कोचिंग की शुरुआत की. जहां पहली बार में ही रेलवे के ग्रुप डी की परीक्षा मे ग्यारह मे से ग्यारह लोगों का चयन करा दिया. ये वो ग्यारह लोग थे जो गरीब तबके से आते थे बच्चों को पढ़ाने के लिये सिखी हिंदी भाषाअन्ना सर मूलता आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं और हिंदी की भाषा का ज्ञान भी नहीं था उन्हें बच्चों से बात करने में अच्छी खासी समस्या आती थी, ऐसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए अन्ना सर ने हिंदी बोलना और पढ़ना सीखा.बचपन में घर चलाने के लिए घर-घर जा कर बच्चों को पढ़ाते थे अन्नाआंध्र प्रदेश में बचपन के पिता को खोने के बाद, वे घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ा कर घर चलाते थे, वे इस दौरान एक आंध्रप्रदेश की एक कोचिंग संस्था से जुड़े और जहां से उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की सभी बारीकियों को सीखा कमजोर बच्चों को अवगत करवाया.अन्ना सर को आनंद कुमार की तरह गणित मे महारत हासिल है और बड़े आसान तरीके से बच्चों को मैथ की ट्रिक याद करा देते हैं, फिलहाल की करीब अभी तक 1 हजार बच्चों को सफलता दिला चुके हैं, फिलहाल करीब 400 लोगों को पढ़ा रहे हैं.