ग्वालियर। शहर के स्टेशन और सिटी सेंटर क्षेत्र के बड़े भूभाग में फैले भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन DRDO लैब को लेकर दिए गए हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रभावित लोगों में असमंजस की स्थिति है. लोग चाहते हैं कि डीआरडीओ की लैब शहर से बाहर कहीं शिफ्ट हो, ताकि अरबों की संपत्ति को नुकसान होने से बचाया जा सके.
DRDO की 200 मीटर की परिधि में बने सभी निर्माण अवैध, असमंजस में प्रभावित - जनहित याचिका
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के आदेश के बाद DRDO की 200 मीटर की परिधि में बने सभी सरकारी और गैर सरकारी बिल्डिंग अवैध हो गए हैं. जिसे हटाने के लिए कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है. वहीं कोर्ट के फैसले के बाद प्रभावित असमंजस में हैं और वे DRDO को शहर से दूर शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं.
हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने 28 मार्च को बड़ा आदेश दिया था, जिसमें कहा गया था कि डीआरडीओ के आसपास 200 मीटर की परिधि में बने सभी भवन, मल्टी, मॉल और सरकारी बिल्डिंग अवैध हैं. हाईकोर्ट ने उन्हें हटाने के लिए भी जिला प्रशासन को निर्देशित किया. करीब 4 साल पहले लगाई गई एक जनहित याचिका का निराकरण करते हुए कोर्ट ने यह आदेश जारी किया था.
इस आदेश का इंप्लीमेंट प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर है. करीब 40 सरकारी और 100 से ज्यादा गैर सरकारी निर्माण 200 मीटर की परिधि के दायरे में आ गए हैं. उन्हें हटाने पर लगभग 6 अरब की संपत्ति प्रभावित होगी. ऐसे में लोग चाहते हैं कि भारत सरकार के इस उपक्रम को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाए. हालांकि कोर्ट ने डीआरडीओ के आसपास बने सभी निर्माणों को हटाने की समय सीमा तय नहीं की है. विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा. वहीं स्थानीय लोग सरकार के आसरे बैठे हैं.