डिंडोरी। इंसान के अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो उसे बुलंदियों को छूने में शारीरिक कमजोरी नहीं रोक सकती. बाधाओं को पार कर वो कामयाबी की इबारत लिख ही लेता है. सहजपुरी में पदस्थ अतिथि शिक्षक भगवानदीन ने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है. भगवानदीन के न तो दोनों हाथ सलामत हैं और न ही पैर यानी वो दोनों हाथ और एक पैर से दिव्यांग हैं. इसके बावजूद लगन और हौसले के दम पर भगवानदीन न सिर्फ अपने घर के काम कर रहे हैं बल्कि नौनिहालों को बेहतर तालीम भी दे रहा है. पिछले चार सालों से वो डिंडोरी जिले में शिक्षा की अलख जगा रहे है.
इस शिक्षक ने सफलता में बदली संघर्ष की कहानी, जिसके आगे हार गई हर परेशानी - हिन्दी न्यूज
डिंडोरी जिले के सहजपुरी गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाले दिव्यांग शिक्षक भगवानदीन हौसले की अनोखी मिसाल है. दोनों हाथ और एक पैर न होने के बाद भी वो बच्चों को न सिर्फ पढ़ाते हैं बल्कि अपने सारे काम भी खुद से ही करते हैं.
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भगवानदीन अपनी लगन और ईमानदारी से काम करते हुए बच्चों का भविष्य सवार रहा है. कलाई ना होने के बावजूद भगवानदीन बच्चों को ब्लैकबोर्ड में लिख कर तालीम देता है. भगवानदीन को इस तरह से पढ़ाते देखकर हर कोई उनका मुरीद हो जाता है. बच्चों की अटेंडेंस रजिस्टर में उपस्थिति लेने की बात हो या फिर ब्लैकबोर्ड में लिखवाकर पढ़ाने की, दोनों ही काम भगवानदीन अपने हाथों से बड़े आसानी से करते हैं.
ईटीवी भारत से बातचीत में भगवानदीन ने बताया कि दोनों हाथ और एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद उन्हें कभी बच्चों को पढ़ाने में दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा. भगवानदीन ने सरकार से मांग की है कि उन्हें स्थायी टीचर बना दिया जाए जिससे वो अपने परिवार का गुजारा कर सके. भगवानदीन केवल बच्चों को अच्छी तालीम देने का काम ही नहीं कर रहे हैं बल्कि समाज में जागृति लाने का प्रयास भी वो बखूबी कर रहे हैं. भगवानदीन उन लोगों के लिए मिशाल हैं जो बाकी बाधाओं को पीछे छोड़ हौसले और जुनून के सहारे आगे बढ़ना चाहते हैं.