राजधानी में बढ़ते कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन लगातार कोशिशों में जुटा हुआ है. इसके बावजूद भी शहर में संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है. प्रदेश में अनलॉक 1.0 की शुरुआत के बाद राजधानी में भी अब पांच दिनों तक पूरा मार्केट खोला जा रहा है. इसके आदेश भी पूर्व में जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इसके साथ ही पूर्व कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने व्यापारियों के साथ बैठक कर शनिवार और रविवार को मार्केट पूरी तरह से बंद किए जाने को लेकर चर्चा की थी और व्यापारियों की सहमति के बाद सप्ताह में शनिवार और रविवार को मार्केट बंद किए जाने के आदेश जारी कर दिए गए थे.
प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक है, जिसे अब नई सौगात मिलने वाली है. खजराना मंदिर को जीरो वेस्ट बनाया जाएगा. मंदिर में आने वाले किसी प्रकार के कचरे का कुछ ना कुछ उपयोग किया जायेगा. अब इस मंदिर को जीरो वेस्ट बनाने की योजना शुरू की जा रही है, जिसमें प्रतिदिन मंदिर में चढ़ने वाले फूल और पत्तियों से अगरबत्ती बनाई जायेगी.
राजधानी में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. प्रशासन की ओर से की जा रही स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के बावजूद भी पॉजिटिव मरीजों की संख्या में इजाफा दर्ज किया जा रहा है. हालांकि पिछले कुछ दिनों से चला आ रहा आंकड़ा 19 जून यानि शुक्रवार को कम जरूर हुआ है, क्योंकि अब तक लगातार 50 की संख्या से ज्यादा ही मरीज प्रत्येक दिन सामने आ रहे थे, लेकिन इसमें थोड़ी कमी देखी गई है, जहां राजधानी में शुक्रवार को 22 नए संक्रमित मरीज मिले हैं. हालांकि एक महिला प्रोफेसर की मौत भी हो गई है.
21 जून को साल 2020 का पहला सूर्य ग्रहण है. वहीं कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने तमाम सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाई हुई है. इसी कड़ी में प्रशासन ने सूर्य ग्रहण को ध्यान में रखते हुए शहर के तमाम घाटों पर 20-21 जून के लिए लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है. कलेक्टर भरत यादव ने आदेश जारी कर दिया है कि 20 और 21 जून को नर्मदा नदी में स्नान पूरी तरह से प्रतिबंधित है. वहीं इस दौरान अगर कोई भी नर्मदा घाट में स्नान करते हुए पाया जाता है तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी.
सदियों से चली आ रही परंपरा को भी कोरोना की नजर लग गई है. पचमढ़ी में सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच नागपंचमी से 10 दिन पहले लगने वाला नागद्वारी मेला इस बार नहीं लगेगा. क्योंकि पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित जंगल में सकरे पहाड़ी क्षेत्रों में सेनिटाइजिंग की व्यवस्था प्रशासन कराने में असमर्थ है. ऐसे में प्रशासन ने मेले को रद्द करने का फैसला किया है.