भोपाल में डॉक्टरों की हड़ताल भोपाल।डीएसीपी लागू करने, पुरानी पेंशन बहाली, मेडिकल वर्क में अधिकारियों की दखलंदाजी जैसे मांगो को लेकर भोपाल में डॉक्टर आंदोलन कर रहे हैं. अब ये 17 तारीख से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला ले चुके है. इसके पहले गुरुवार को प्रदेश के सभी 52 जिलों में डॉक्टर ने 2 घंटे काम बंद रखा. भोपाल की हमीदिया अस्पताल परिसर में डॉक्टर सुनें प्रतीकात्मक यज्ञ किया जिसमें इन्होंने अपने उपकरणों की आहुति दी.
सरकार को चेतावनी:मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षक संघ के अध्यक्ष राकेश मालवीय का कहना है कि, मध्य प्रदेश में कई समय से चिकित्सकों का प्रमोशन रुका है. कई वेतन विसंगतियां भी हैं. इसको लेकर सरकार को बार-बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रही. इनका कहना है कि आज रात तक अगर उनकी मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कल से हड़ताल होगी जो अनिश्चितकालीन रहेगी.
अस्पताल में दिखा असर:डॉक्टर्स का 2 घंटे काम बंद करने का असर अस्पतालों में भी देखने को मिला. यहां इलाज कराने आए मरीज परेशान होते हुए नजर आए. भोपाल के बाहर से इलाज कराने आने वाले मरीजों का कहना है कि डॉक्टर्स ने 2 घंटे काम बंद किया है. ऐसे में किसी का पर्चा नहीं बना तो किसी की जांच नहीं हो पाई. अगर कल अनिश्चितकालीन हड़ताल होती है तो खासी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. फिलहाल शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डॉक्टर चले जाएंगे. ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं पर खासा प्रभाव पड़ेगा और इलाज कराने आने वाले मरीजों की शामत तक आ सकती है.
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सीएम के हाथ छोड़ा फैसला:आपको बता दें इसके पहले डॉक्टर ने प्रदेश भर में पदयात्रा समर्थन जुटाया है. डॉक्टर्स की इस यात्रा में 7 मेडिकल एसोसिएशन ने मिलकर महासंघ बनाया है. इसमें मेडिकल टीचर, चिकित्सा शिक्षा अधिकारी,चिकित्सा शिक्षक कर्मचारी अधिकारी संघ व अन्य डॉक्टर और नर्स भी जुड़े हुए हैं. जिसके बैनर तले ये आंदोलन हो रहा है. इस संघ के संयोजक डॉ. राकेश मालवीय का कहना है कि, हमने सभी डॉक्टर्स को एकजुट कर लिया है. सरकार से भी बार-बार अपनी मांग रख दी है. ऐसे में अंतिम फैसला अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को करना है.
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अब तक 13 से अधिक कालेजों में संपर्क:ये यात्रा 27 जनवरी 2023 को ग्वालियर से आरंभ हुई थी. जो मध्यप्रदेश के मुरैना, अम्बाह, भिंड, दतिया, शिवपुरी, ओरछा, निवारी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, मंडला, जबलपुर, कटनी, सिवनी, छिंदवाड़ा, बैतूल, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार, रतलाम, मंदसौर, उज्जैन, शाजापुर, देवास, इंदौर, ब्यावरा, विदिशा, सागर, दमोह, रायसेन होते हुए मध्य प्रदेश के 38 जिलों के सीएचसी, पीएचसी,जिला अस्पतलों एवं 13 मेडिकल कॉलेजों से गुजरते हुए 7 फरवरी को भोपाल में समापन हुआ था.
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5500 किलो मीटर की थी यात्रा:चिकित्सा शिक्षा संघ के अविनाश ठाकुर का कहना है कि, ग्वालियर से शुरू हुई यह यात्रा का भोपाल पर मंगलवार को समापन हुआ. इसमें लगभग 5500 किलोमीटर हम चल चुके होंगे. इस दौरान जगह-जगह हमें सभी डॉक्टर्स, मेडिकल टीचर और मेडिकल लाइन से जुड़े छात्र और नर्सेज का भी काफी समर्थन मिला था. यात्राओं में भी बड़ी संख्या में चिकित्सक जुड़ रहे हैं. 8 से 10 हज़ार तक डॉक्टर्स महासंघ में शामिल हो चुके है. हमारा उद्देश्य सिर्फ सभी को एकजुट करना है.