भोपाल। प्रदेश के सहकारी बैंकों के द्वारा किए जा रहे कारनामों का संज्ञान सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह पूरी गंभीरता से लिया है. भोपाल और होशंगाबाद संभाग के जिला सहकारी बैंकों के कार्यों की समीक्षा के दौरान कई वित्तीय गड़बड़ियां भी सामने आई हैं. सहकारिता मंत्री ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. साथ ही उन बैंकों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं, जिन्होंने बिना आयुक्त सहकारिता की अनुमति के ही वेतन बढ़ा दिया है.
जिला सहकारी बैंकों की वित्तीय गड़बड़ियों पर सहकारिता मंत्री सख्त देर रात अपैक्स बैंक के सभागार में हुई बैठक के दौरान मंत्री गोविंद सिंह ने अधिकारी कर्मचारियों से साफ कह दिया है कि जो भी बैंकों को नुकसान पहुंचा रहा है. ऐसे कर्मचारी को तत्काल नौकरी से बाहर किया जाएगा और अच्छा काम करने वाले लोगों को पदोन्नति कर सम्मानित करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि वित्तीय गड़बड़ी करने वालों से राशि वसूली जाए और उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाए.
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के 118 करोड़ रुपए के निवेश घोटाले में अफसरों के जांच में घिरने के बाद भी बैंक प्रबंधन ने सबक नहीं लिया है. बैंक ने एक बार फिर 10 करोड़ रुपए यस बैंक में निवेश कर दिया. यह राशि 5 साल तक बैंक की जरूरत पड़ने पर भी नहीं निकाली जा सकती हैं. मामले का खुलासा होने पर प्रदेश के सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह ने बैंक के प्रबंध संचालक आरपी हजारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
मंत्री गोविंद सिंह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का महत्वपूर्ण योगदान है. लिहाजा जरूरत है कि इनकी वित्तीय स्थिति को सुधारी जाय. उन्होंने कहा कि पिछले साल इनकी वित्तीय स्थिति काफी बिगड़ी है. इसके लिए सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी निरंतर संभागीय बैठकें आयोजित कर इनके कार्यों की समीक्षा करें.
आयुक्त सहकारिता एमके अग्रवाल ने बताया कि सागर और जबलपुर संभाग को छोड़कर सभी बैठकें की जा चुकी हैं और भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा.
प्रमुख सचिव सहकारिता अजीत केसरी ने बताया कि सहकारी बैंक मुख्य रूप से किसानों को अल्प अवधि कृषि ऋण देने का कार्य करते हैं. उन्होंने दिए गए ऋणों की समय से वसूली किए जाने की जरूरत बताई. जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों की जिलेवार समीक्षा में पाया गया कि सभी बैंकों द्वारा दिए गए कालातीत ऋणों (NPA) की राशि अत्यधिक है. बैंकों के स्तर पर ऋणों की वसूली के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए. मंत्री सिंह ने निर्देश दिए है कि ज्यादा से ज्यादा आगामी एक साल तक एक्सपायर्ड ऋणों की वसूली सुनिश्चित की जाए.