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MP Panchayat Election Result: जनता को माना भगवान, सात साल पहले इसी जिला पंचायत में मिली थी हार, तब से आज तक नंगे पैर घूम कर जीता जनता का दिल - विक्रम बालेश्वर ने छोड़े जूते चप्पल

भोपाल जिला पंचायत के वार्ड क्रमांक 8 से विक्रम बालेश्वर ने जीत हासिल की है (Vikram Baleshwar won from Bhopal). उन्हें इस पंचायत से सात साल पहले हार मिली थी, तभी से उन्होंने सात साल तक जनता को भगवान मानते हुए जूते-चप्पल का त्याग कर दिया था. (MP Panchayat Election Result)

MP Panchayat Election Result
एमपी पंचायत चुनाव परिणाम

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Published : Jul 16, 2022, 5:10 PM IST

भोपाल।जिला पंचायत के वार्ड क्रमांक 8 से जिस प्रत्याशी ने जीत हासिल की है. उन्होंने कसम खा रखी थी कि जब तक वह चुनाव नहीं जीत लेंगे तब तक वह जूते चप्पल नहीं पहनेंगे. जीते हुए सरपंच प्रत्याशी विक्रम बालेश्वर भोपाल के वार्ड क्रमांक 8 नजीराबाद से 7 साल पहले जिला पंचायत का चुनाव हार गए थे (Vikram Baleshwar won from Bhopal). तब से उन्होंने कसम खा रखी थी कि जब तक जनता का आशीर्वाद नहीं मिल जाता तब तक जनता के बीच जूते चप्पल बिना पहने मैं जाऊंगा. पिछले जिला पंचायत में वह 68 वोटों से चुनाव हार गए थे, मंडी चुनाव में भी किस्मत आजमाई लेकिन वहां भी हार मिली. आखिरकार इस बार जनता ने इनकी तपस्या को देख इन्हें 3000 से ज्यादा वोटों से जिताया है.(MP Panchayat Election Result)

विक्रम को कई बार मिली है निराशा: 38 साल के विक्रम बालेश्वर भोपाल के ग्राम भमौरा के रहने वाले हैं. पेशे से वे किसान हैं. उन्होंने एमए तक पढ़ाई की है. सबसे पहले उन्होंने 2010 के पंचायत चुनाव में किस्मत आजमाई, लेकिन जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार गए. 2012 में मंडी समिति के चुनाव में फिर वे मैदान में उतरे, लेकिन उस समय भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद 2015 में हुए पंचायत चुनाव में वे फिर से जिला पंचायत के वार्ड-8 से मैदान में उतरे थे, जहां वे 68 वोटों से चुनाव हार गए थे. (Vikram Baleshwar given up shoes and slipper)

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मैंने जनता को भगवान माना:विक्रम ने बताया, जिस तरह मंदिर या दूसरे धार्मिक स्थलों पर लोग नंगे पैर जाते हैं. उसी तरह मैं जनता के पास नंगे पैर ही गया, क्योंकि जनता भगवान के समान है. 2015 में चुनाव हारने के बाद से मैंने जूते-चप्पल त्याग दिए थे. यहां तक कि किसी शादी समारोह में भी मैं नंगे पैर ही जाता था. पिछले 7 साल से गांवों में मैं बिना चप्पल के जाता हूं. विक्रम बालेश्वर कहते हैं कि मैंने भी ठान लिया था की मेरा वार्ड ही अब मेरे लिए मंदिर समान है. मंदिर में लोग जूते नहीं पहनते. मैंने भी पिछले 7 साल लगातार लोगों के बीच जन संपर्क स्थापित किया. उनकी मदद की और आज जनता ने मुझे आशीर्वाद देकर जीता दिया है.

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