रांची:निलंबित आईएएस अधिकारी छवि रंजन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. रिमांड की अवधि खत्म होने के बाद अब छवि रंजन को न्यायिक हिरासत में रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में रहना होगा. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने चार दिनों की रिमांड की अवधि खत्म होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था के बीच छवि रंजन को मंगलवार को ईडी के विशेष अदालत में पेश किया, जहां पीसी छवि रंजन को न्यायिक हिरासत में रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया.
न्यायिक हिरासत में भेजे गए निलंबित आईएएस अधिकारी छवि रंजन, रांची जेल बना नया ठिकाना - Jharkhand news
निलंबित आईएएस अधिकारी छवि रंजन एक बार फिर से न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में भेजे दिए गए हैं. इससे पहले वे ईडी की रिमांड पर थे.
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लगातार दस दिनों तक हुई पूछताछ:इससे पहले गिरफ्तार किए जाने के बाद ईडी ने छवि रंजन से लगातार दस दिनों तक पूछताछ कर चुकी है. 16 मई छवि के रिमांड का आखिरी दिन था, जिसके बाद ईडी के विशेष अदालत में छवि रंजन को पेश किया गया. गौरतलब है कि 4 मई को जमीन घोटाले में संलिप्तता पाए जाने के बाद रांची के पूर्व डीसी आईएएस अधिकारी छवि रंजन को गिरफ्तार कर लिया गया था. इससे पहले मंगलवार को दिन में लगभग एक बजे पर ईडी दफ्तर से छवि रंजन को अदालत लाया गया. अदालत में पेश करने के बाद ईडी ने तीसरी बार रिमांड के लिए आवेदन नहीं दिया, जिसके बाद अदालत के आदेश पर छवि रंजन को रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया. मामले में अगली सुनवाई अब 25 मई को होगी.
04 मई को किया गया था गिरफ्तार, छह दिन हुई पूछताछ:जमीन घोटाले मामले में लंबी पूछताछ के बाद 4 मई को रात के लगभग 9.44 बजे छवि रंजन को गिरफ्तार करने के बाद ईडी ने उन्हें 5 मई को ईडी के विशेष अदालत में पेश किया था, जहां से अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया था. 5 मई को ही ईडी ने अदालत से छवि रंजन को रिमांड पर लेने के लिए आवेदन दिया था. अवकाश रहने की वजह से रिमांड की मंजूरी शनिवार की सुबह मिली. जिसके बाद 12 मई की दोपहर तक पूछताछ करने के बाद छवि को विशेष अदालत में पेश किया गया.
कैसे सेना जमीन की साजिश का हिस्सा बने छवि:रांची में डीसी बनने के बाद छवि रंजन के समक्ष यह मामला सामने आया कि सेना और जमीन के मालिक रहे बीएम भास्कर राव के वंशज जयंत करनाड जमीन पर दावेदारी की है. करनाड के पक्ष में कोर्ट ने कुछ फैसला भी सुनाया था, लेकिन जमीन पर करनाड का कब्जा न हो इसके लिए अफसर अली, प्रदीप बागची ने कोलकाता के रजिस्ट्रार ऑफ एश्योरेंस में कागजों की हेरफेर करवाई, इसके बाद जमीन का फर्जी डीड तैयार करवा लिया. इसी डीड के आधार पर प्रेम प्रकाश, अमित अग्रवाल और छवि रंजन ने साजिश के तहत अमित की कंपनी के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करा दी. ईडी ने पाया है कि पद का दुरुपयोग कर छवि रंजन के द्वारा कई गलत कार्य किये गए.