रांचीः झारखंड विधानसभा के बजट सत्र 2021 की कार्यवाही में मंगलवार को तारांकित प्रश्न के तहत भाजपा विधायक अमर बावरी ने बोकारो के चंदनक्यारी स्थिति वेदांता कंपनी यानी इलेक्ट्रो स्टील पर विस्तारीकरण के लिए नियमों को ताक पर रखकर कंपनी परिसर के भीतर की गई जनसुनवाई के मामले को गंभीर बताया. बावरी ने इस मामले में खुले में जनसुनवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि अगर जनसुनवाई कंपनी परिसर के बाहर हुई है तो वह अपना इस्तीफा दे देंगे. इस पर प्रभारी मंत्री चंपई सोरेन का ठोस जवाब नहीं आने पर सीएम ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि जनसुनवाई का मतलब है कि सभी की उपस्थिति, जन सुनवाई बंद कमरे में नहीं होती है. उसकी रिकॉर्डिंग भी होती है. इस पर सीएम ने कहा कि इस मामले को जरूर देखा जाएगा.
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मुख्यमंत्री ने दिया जवाब
इसी कंपनी से हो रहे प्रदूषण के मामले को भी अमर बावरी ने उठाया. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रो स्टील कंपनी की स्थापना 2008 में हुई थी. अब यह कंपनी विस्तारीकरण कर रही है, लेकिन 13 वर्षों में कंपनी ने न तो एक स्कूल खोला न ही अस्पताल, कंपनी की वजह से इलाके में प्रदूषण फैल रहा है. लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में करीब 6 हजार उद्योग हैं. उन्होंने कहा कि एक समय बोकारो स्टील प्लांट के अस्पताल की चर्चा पूरे राज्य में होती थी लेकिन उसकी हालत भी खराब हो गई है. इसे ध्यान में रखते हुए बोकारो स्टील और इलेक्ट्रोस्टील से स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने को लेकर चर्चा भी हो रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रो स्टील कंपनी ने नए सिरे से आंगनबाड़ी समूह बनाया है लेकिन अमर बावरी ने कहा कि कोई नया आंगनबाड़ी नहीं बना है बल्कि पुराने को नया नाम दिया गया है. इस मसले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष की तरफ से काफी देर तक टीका टिप्पणी हुई. हालांकि मुख्यमंत्री के जवाब से अब स्पष्ट हो गया है कि इलेक्ट्रो स्टील के विस्तारीकरण को लेकर कंपनी परिसर के बाहर जनसुनवाई होगी.
डीवीसी मामले पर सीएम ने विपक्ष से मांगा सहयोग
झारखंड विधानसभा में ध्यानाकर्षण के दौरान कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने डीवीसी यानी दामोदर वैली कारपोरेशन की मनमानी का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि यह कंपनी झारखंड के सारे रिसोर्स का इस्तेमाल करती है लेकिन सीएसआर के तहत मैथन क्षेत्र के आदिवासी और मुस्लिम बहुल गांवों में कोई काम नहीं करती है.इस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि डीवीसी पर नकेल कसा जाएगा लेकिन इसके लिए सर्वसम्मति की जरूरत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी वाकिफ हैं कि डीवीसी मोनोपोली की कोशिश में है. यह कंपनी सिर्फ उद्योग घरानों को बिजली देती है, इसको आम लोगों की चिंता नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर विपक्ष सहयोग करे तो इस कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
कटौती प्रस्ताव वापस लेने की शर्त
सदन में आज ग्रामीण विकास विभाग पथ निर्माण विभाग नगर विकास विभाग और भवन निर्माण विभाग के अनुदान मांगों पर भोजनावकाश के बाद चर्चा हुई. अनुदान मांगों पर भाजपा विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी ने कटौती प्रस्ताव पेश किया. उन्होंने चारों विभाग की कई खामियां गिनाई साथ ही कुछ सुझाव भी दिए. उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती रघुवर सरकार की योजनाओं का नाम बदलकर सरकार वाहवाही लूट रही है. रामचंद्र चंद्रवंशी ने समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि विधायकों को क्वार्टर रिपेयरिंग के नाम पर 4 लाख मिल रहे हैं जबकि किसी को 1 करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं. कटौती प्रस्ताव के विरोध में सीता सोरेन, प्रदीप यादव, अमित यादव, विनोद सिंह, वैद्यनाथ राम और इरफान अंसारी ने अपना पक्ष रखा. लेकिन सरकार की तरफ से मंत्री आलमगीर आलम का जवाब आने के बाद स्पीकर ने जब कटौती प्रस्ताव वापस लेने को कहा तो रामचंद्र चंद्रवंशी ने एक शर्त रख दी. उन्होंने कहा कि विधायक फंड की राशि चार करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दी जाएगी तो वह अपना कटौती प्रस्ताव वापस लेंगे. इसके बाद स्पीकर ने मतदान कराया और सर्वसम्मति से अनुदान मांग स्वीकृत हो गया.
बाबूलाल मरांडी ने कहा नहीं पड़ता है कोई फर्क
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन बाबूलाल मरांडी ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं मिलने को लेकर चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि जब इलेक्शन कमीशन ने मान लिया है, झारखंड विकास मोर्चा खत्म हो चुका है. विधानसभा अध्यक्ष मानने को तैयार नहीं हैं कि झारखंड विकास मोर्चा खत्म हो गया है और वो झारखंड विधानसभा में इसे जिंदा रखे हुए हैं. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष मान लिया है और भारतीय जनता पार्टी अपने सिद्धांतों पर चलती है. विधानसभा अध्यक्ष के मानने या ना मनाने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में चुनाव को लेकर तमाम गतिविधियां चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित की जाती है और जब चुनाव आयोग की तरफ से यह माना गया है कि झारखंड विकास मोर्चा का अस्तित्व समाप्त हो चुका है. पार्टी पूरी तरह से मर चुकी है. लेकिन विधानसभा के कार्य मंत्रणा में इसे विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जिंदा रखा गया है.