रांची:राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के साथ-साथ कॉलेज केंपसों में कुछ दिनों बाद रौनक लौटने की उम्मीद है. विश्वविद्यालयों और कॉलेज प्रबंधकों को इस सेशन में सही तरीके से पठन-पाठन कराना एक बड़ी चुनौती होगी. नए सत्र में कॉलेजों में रैगिंग होती है, तो दूसरी ओर कोरोना को देखते हुए सुरक्षात्मक कदम भी प्रबंधकों को उठाना होगा, हालांकि इस दिशा में डीएसपीएमयू योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है.
कॉलेज खोलने के बाद प्रबंधक के पास होगी चुनौती10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोले जाने के बाद जल्द ही विश्वविद्यालय, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों के लिए भी गाइडलाइन जारी हो सकता है. इसे लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक भी सीएम की अध्यक्षता में होनी है. कॉलेज खुलने के बाद कॉलेज प्रबंधन के सामने कई चुनौतियां होगी. पहली चुनौती कोरोना वायरस से बचाव को लेकर सुरक्षात्मक कदम उठाने होंगे, तो वहीं नए एकेडमिक सेशन शुरू होने के कारण कॉलेजों में रैगिंग की भी एक बड़ी समस्या होगी. नए बच्चे कॉलेज और विश्वविद्यालय कैंपस में आते हैं और उन विद्यार्थियों के साथ पुराने स्टूडेंट सही तरीके से पेश नहीं आते हैं. रैगिंग के जरिए ऐसे नए विद्यार्थियों को परेशान किया जाता है. सीनियर स्टूडेंट के ओर से उन्हें कई तरीके का टास्क दिया जाता है और टास्क पूरा नहीं करने पर उन्हें पनिशमेंट दिया जाता है, लेकिन इन चुनौतियों से निपटने के लिए डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय ने पूरी तैयारी कर ली है. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में ऑफलाइन क्लासेस संचालित किए जाने को लेकर तैयारियां कर ली गई है. साफ-सफाई की व्यवस्था भी हो गई है.इसे भी पढे़ं:
ETV BHARAT की पड़ताल: रांची के सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति कमरैगिंग रोकने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारीवहीं रैगिंग से निपटने के लिए एंटी रैगिंग सेल का गठन साल 2018 में ही किया गया था. इस सेल को और मजबूत किया जा रहा है. वहीं विश्वविद्यालय के चप्पे-चप्पे, गलियारे क्लासरूम और कॉलेज कैंपस में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं. पहले से ही डीएसपीएमयू विश्वविद्यालय में लगभग डेढ़ सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं, लेकिन नए सेशन में रैगिंग को रोकने के लिए और 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरे विभिन्न स्थानों पर लगाए जा रहे हैं, ताकि इसकी निगरानी की जा सके और अव्यवस्था फैलाने वाले विद्यार्थियों पर नकेल कसा जा सके.