रांची: झारखंड को कभी जंगल के मामलों में संपन्न माना जाता था. लेकिन शहरीकरण की वजह से वन क्षेत्रों में कमी देखी जा रही थी, लेकिन पिछ्ले कुछ सालों से सरकार की कोशिश के बाद एक राहत भरी खबर आई है. ऑल स्टेट फॉरेस्ट रिपोर्ट के अनुसार झारखंड के वन क्षेत्र में बढ़ोतरी देखी गयी है.
राज्य के गठन के बाद से वन क्षेत्र में हुई बढ़ोतरी
वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुसार झारखंड में वनों पर विभिन्न प्रकार के जैविक दबाव है विशेष कर पेड़ों की कटाई, जलावन के लिए लकड़ी की निकासी इसके अलावा खनन से भी जंगलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. बावजूद इसके राज्य में वनों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर हुई है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के गठन के बाद वन क्षेत्र में 916 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है.
हर 2 सालों में वन के क्षेत्रों में हो रही है बढ़ोतरी
⦁ राज्य का वनावरण 2001 से 2017 तक की अवधि में 22,637 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 23,553 वर्ग किलोमीटर हो गया है.
⦁ वनों के बाहर वृक्ष आवरण भी 2783 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2922 वर्ग किलोमीटर हो गया है.
इसे लेकर वन अधिकारी वीएस गौड़ बताते हैं कि देहरादून स्थित भारत सरकार की भारतीय वन सर्वेक्षण के मुख्य कार्यालय के अनुसार झारखंड के वन क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है. राज्य के गठन के बाद भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून की पिछले आठ रिपोर्ट के अनुसार झारखंड हर दूसरे साल वन क्षेत्रों की बढ़ोतरी कर रहा है.
वन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही है कई योजनाएं
झारखंड सरकार की ओर से वन के क्षेत्रों में बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. उनमें जन वन योजना, वन्य जीवन संरक्षण और अपराध नियंत्रण योजना, प्रशिक्षण प्रचार अनुसंधान और मूल्यांकन योजना, सिल्वीकल्चर ऑपरेशन, अधिसूचित वन भूमि के अंदर/बाहर वृक्षारोपण योजना, अस्थाई पौधशाला और सीड आर्चडस योजना, झारखंड सहभागी प्रबंधन योजना और इको टूरिज्म योजना शामिल है.