रांची: विपक्ष के हंगामे के बीच वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने 2019-20 का आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट सदन के पटल पर रखा. रिपोर्ट के मुताबिक इस साल विकास दर 7.2 प्रतिशत अनुमानित है. रिपोर्ट के मुताबिक 2014-15 में राज्य की अर्थव्यवस्था की औसत वार्षिक दर 12.5 प्रतिशत थी, जिसमें 2015-16 में जबरदस्त कमी आई और यह -6.2 प्रतिशत पर चली गई, जो 2015-16 से 2018-19 की अवधि में औसतन 5.7 प्रतिशत रही. अहम बात है कि 2016-17 में राजस्व घाटा, सकल घरेलू उत्पाद का 4.31 प्रतिशत और 2017-18 में 4.32 प्रतिशत चला गया था, जो 2018-19 में घटकर 2.16 प्रतिशत रहा. अनुमान के मुताबिक 2019-20 में भी यह घाटा राज्य सकल घरेलू उत्पाद का 2.09 प्रतिशत हो सकता है.
गरीबी के मामले में 25वें पायदान पर झारखंड
खास बात है कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश के सभी 28 राज्यों की तुलना में झारखंड 25वें स्थान पर है. सिर्फ बिहार, उत्तर प्रदेश और मणिपुर की प्रति व्यक्ति आय झारखंड से कम है. आर्थिक सर्वेक्षण में वैश्विक बहुआयामी गरीबी इंडेक्स 2019 का जिक्र किया गया है, जिसे जुलाई 2019 में OPHI और UNDP ने जारी किया था. इसके तहत साल 2015-16 में झारखंड के 46.5 प्रतिशत लोग यानी करीब 1.62 करोड़ लोग बहुआयामी रूप से गरीब थे. राज्य की अर्थव्यवस्था में प्रक्षेत्रवार योगदान की बात की जाए तो तृतीयक प्रक्षेत्र यानी टरशियरी सेक्टर का योगदान 2019-20 में 65 प्रतिशत रहा है, जबकि प्राथमिक प्रक्षेत्र में 15 और द्वितीयक प्रक्षेत्र में 20 प्रतिशत रहा है. मुद्रास्फीति की दर देश की मुद्रास्फीति की दर के समान बतायी गई है.
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