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गिरिडीह कोलियरी में फिर से जान फूंकने की कवायद, महाप्रबंधक ने कहा- सबका सहयोग जरूरी - गिरिडीह की खबर

पिछले दो दशक से विपरीत परिस्थिति से गुजर रही गिरिडीह कोलियरी का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है. अब यह घाटा 160 करोड़ पहुंच चुका है. ऐसे में इस कोलियरी फिर से पटरी पर लाने की कवायद शुरू की गई है. महाप्रबंधक के नेतृत्व में योजना बनाई गई है. सदर और गांडेय विधायक ने पूरे सहयोग का भरोसा दिया है.

interview of Giridih Colliery General manager
गिरिडीह कोलियरी

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Published : Jan 18, 2021, 12:31 PM IST

गिरिडीहः जिले की एकमात्र पब्लिक सेक्टर सीसीएल गिरिडीह कोलियरी इन दिनों काफी विपरीत परिस्थिति से गुजर रही है. कबरीबाद में उत्पादन पिछले तीन वर्ष से बंद है. सीटीओ रिनूवल न होने के कारण ओपेनकास्ट में भी 31 दिसंबर के बाद से कोयला का उत्पादन नहीं हो रहा है. उस पर कोयले की चोरी और अवैध माइंस का संचालन भी रह रहकर परेशानी को बढ़ाती है. वर्तमान में गिरिडीह कोलियरी का घाटा 160 करोड़ पार कर चुका है. ऐसे में कोलियरी को संकट से उबारने का प्रयास प्रबंधन स्तर से शुरू किया गया है.

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जिले के सदर विधायक सुदिव्य कुमार के अलावा गांडेय विधायक डॉ सरफराज अहमद ने प्रबंधन को पूरे सहयोग का भरोसा दिया है. यूनियन लीडर एनपी सिंह, तेजलाल मंडल, हरगौरी साहू ने उत्पादन बढ़ाने और खर्च कम करने को लेकर आवश्यक सलाह दी है. वहीं, महाप्रबंधक मनोज कुमार अग्रवाल ने परियोजना पदाधिकारी विनोद कुमार के साथ मिलकर प्लानिंग के साथ लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश शुरू की है. इस मामले को लेकर जीएम एमके अग्रवाल से ईटीवी भारत ने पूरी जानकारी ली.

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कबरीबाद में आउटसोर्सिंग का प्लान

जीएम ने कहा कि कम खर्च में कोयले का ज्यादा से ज्यादा उत्पादन हो इसकी योजना तैयार की गई है. एक तरफ कबरीबाद को आउटसोर्सिंग मोड़ में करने का निर्णय लिया गया है. साथ ही साथ यहां की मशीनों को ओपेनकास्ट भेजा जाएगा, ताकि वहां पर उत्पादन को गति दी जा सके. उन्होंने कहा कि वैसे पूरे घाटे से उबरने के लिए दोनों माइंस से प्रति वित्तीय वर्ष में 7-7 लाख टन कोयला का उत्पादन करना जरूरी है. इतना उत्पादन होने के बाद घाटे से यह कोलियरी उबर पायेगी. इसके अलावा खर्च में कटौती की प्लानिंग की गई है.

कोयला चोरी पर पूरी तरह लगेगी रोक

उन्होंने कहा कि इसके अलावा कोयला की चोरी भी परेशानी का कारण है. इससे निपटने के लिए प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय लोगों से सहयोग की आवश्यकता है. जीएम ने कहा कि अभी एसडीपीओ के साथ मिलकर युद्धस्तर पर अवैध माइंस को भरने का काम किया जा रहा है. यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी.

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