सिमडेगा: उच्च न्यायालय झारखंड की न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी ने जिले का दौरा किया. उन्होंने सर्वप्रथम सिविल कोर्ट पहुंच सभी कार्यों का अवलोकन किया और वस्तुस्थिति की जानकारी एडीजे मधुरेश वर्मा से ली. उसके बाद उन्होंने बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया. जहां उपायुक्त सिमडेगा सुशांत गौरव और पुलिस कप्तान डाॅक्टर शम्स तबरेज ने उनका स्वागत किया.
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उन्होंने सुधार गृह के सभी कमरोंं का अवलोकन किया. कमरोंं के रख-रखाव, साफ-सफाई, संवासी के दैनिक गतिविधि की जानकारी और संवासी को दिये जाने वाली सुविधाओं का जायजा लिया. सर्वप्रथम उन्होंने किशोरों के रहने वाले कमरे, शौचालय की जांच की. मूलभूत सुविधाओं सहित कमरोंं को बेहतर तरीके से सुसज्जित करने की बात कही. प्रतिदिन बच्चों को निर्धारित समय अवधि के अंतर्गत निवर्हन किये जाने वाले कार्यों को समयबद्ध किया जा रहा है या नहीं उसकी जानकारी ली. बच्चों को शारीरिक रूप से फिट रखने हेतु योगा टीचर की बहाली करने को कहा. पूरे गृह परिसर में अनुशासन का शतप्रतिशत अनुपालन हो, आने वाले दिनों में बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में कौशल विकास हेतु कृषि क्षेत्र में प्रशिक्षण, स्मार्ट क्लास का संचालन कराया जाए. किशोर न्याय बोर्ड, रिक्रेशन रूम, स्मार्ट क्लास रूम, डायनिंग रूम इत्यादि भवनों का उन्होंने निरीक्षण किया.
उन्होंने कहा गृह के बच्चों से ऑनलाईन संपर्क स्थापित कर उन्हें बेहतर परामर्श और उनके हालचाल की वस्तुस्थिति की जानकारी लेने हेतु ऑनलाइन सुविधा को बेहतर बनाएं. बच्चों के उज्जवल भविष्य और उन्हें मुख्य दिशा की ओर अग्रसर करने की दिशा में उन्होने अधिकारियों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए. रि्मांड होम के 23 संवासियों को अलग-अलग बुलाकर उनकी काउंसिलिंग की. जहां उन्होंने बच्चों को गृह के माध्यम से दिये जाने वाले सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए, उनके बेहतर भविष्य हेतु परामर्श दिये.
जज अनुभा रावत चौथरी ने गृह अधीक्षक को निर्देश दिया कि गृह में पौधों का गमला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करायें. संवासियों को क्रमबद्ध तरीके से गमला आवंटित करते हुए गमले की रख-रखाव करने की जिम्मेवारी सौंपने की बात कही. ताकि बच्चों में जिम्मेदारी की भावना आए. उपायुक्त सुशांत गौरव ने माननीय न्यायाधीश को बाल सुधार गृह के आवश्यक मूल भूत सुविधाओं के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जिले में मानव तस्करी पर अंकुश लगाने हेतु सभी प्रखंड में चौकीदार, सेविका, सहायिका, वार्ड सदस्य के द्वारा गांव, टोला स्तर पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. जो भी व्यक्ति बाहर से आ रहे हैं और गांव, टोला के व्यक्ति जिले से बाहर जा रहे हैं, उनकी पंजी संधारण करने की कार्रवाई की जा रही है. ताकि किसी भी तरह की समस्या होने पर व्यक्ति को तुरंत ट्रेसआउट करते हुए कार्रवाई की जा सके, साथ ही मानव तस्करी के कलंक से जिला को मुक्त किया जा सके.