शिमला:हिमाचल के 1652 जवान देश की रक्षा में बलिदान हुए हैं. प्रदेश में 1,18,642 पूर्व सैनिक हैं. इससे भी बढ़कर 1159 गैलेंटरी अवॉर्ड्स से हिमाचल की तस्वीर दमक रही है. जिनमें भारतीय सेना के सर्वोच्च सम्मान के तौर पर 4 परमवीर चक्र, 2 अशोक चक्र, 10 महवीर चक्र, 18 कीर्ति चक्र, 51 वीरचक्र, 89 शौर्य चक्र और 985 अन्य सेना मैडल शामिल हैं.
अगर आबादी के लिहाज से देखें तो भारतीय सेना को मिले शौर्य सम्मानों में से हर 10वां मेडल हिमाचल के जवान के सीने पर सजा है. लंबे समय तक सेना में सेवाएं दे चुके सरकाघाट से विधायक कर्नल इंदर सिंह ने कहा की अदम्य साहस की दृष्टि से देखें तो मेजर सोमनाथ शर्मा की बहादुरी ने देश के पहले परमवीर चक्र की गाथा लिखी. कबाइली हमले के दौरान मेजर सोमनाथ की दिलेरी किसी परिचय का मोहताज नहीं है.
विधायक कर्नल इंदर सिंह ने कहा कि 1962 की जंग में मेजर ध्यान सिंह थापा ने अपनी बहादुरी से सारी दुनिया को कायल किया था. करगिल की जंग में कैप्टन विक्रम बत्रा का खोफ पाकिस्तान की सेना पर इस कदर था कि वह उसे शेरशाह पुकारते थे.
कर्नल इंद्र सिंह ने कहा कि कैप्टन बत्रा ने अंतिम सांस युद्ध भूमि में ली. उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र दिया गया. करगिल जंग में ही राइफलमैन संजय कुमार का साहस अतुलनीय रहा. इसी तरह कण-कण में देवता और घर-घर में शूरवीर की परंपरा की तस्वीर लगातार दमक रही है.
कर्नल इंदर सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने पूर्व सैनिकों विकलांग पूर्व सैनिकों और युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों को रोजगार देने के लिए निर्देशक सैनिक कल्याण के नियंत्रण में विशेष रोजगार कक्ष की स्थापना की है. पूर्व सैनिक और आश्रित अपनी शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता केवल 3 पदों के लिए अपने रोजगार कार्यालय में पंजीकर्ण करवा सकते हैं.