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राजधानी दिल्ली समेत देश के महानगरों में बढ़ी हिमाचली फूलों की मांग, एडवांस बुकिंग मिलने से किसान खुश

हिमाचल की लाहौल घाटी के फूलों की मांग इतनी बढ़ गई है कि व्यापारी द्वारा फूलों की बुकिंग सीधे खेतों से की जा रही है. घाटी में उगाई जा रही लिलियम की दो किस्में ओरिएंटल और एशियाटिक दिल्ली की गाजीपुर फूल मंडी में अपना विषेश स्थान बना लिया है.

लाहौल घाटी के फुलों का देश भर में चला जादू

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Published : Jul 22, 2019, 10:13 AM IST


कुल्लूः लाहौल घाटी में फूलों का सीजन शुरू हो गया है. घाटी के फुलों की खुशबू दिल्ली की फूल मंडी से होते हुए देश के बडे़-बड़े महानगरों में पहुंच रही है. दिल्ली से इन फूलों के गुच्छे चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, जयपुर और आगरा जैसे बड़े शहरों में फ्लाइट से पहुंचाया जा रहा है.

इन फूलों की मांग इतनी ज्यादा है कि इसके व्यापारी लाहौल के खेत से ही इसकी बुकिंग कर रहे हैं. लाहौल में उगाए जा रहे लिलियम प्रजाति के दो किस्मों के फूल ओरिएंटल और एशियाटिक अपनी पहचान बना चुके हैं.

लाहौल घाटी के फुलों का देश भर में चला जादू

70 सदस्यों वाली दी पट्टन वैली फ्लोरीकल्चर सोसायटी के सदस्य किसान बेहतर गुणवत्ता से अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं. सोसायटी पदाधिकारियों के मुताबिक किसानों को इस बार एशियाटिक ए ग्रेड फूल के प्रति छड़ी 11 और बी ग्रेड के 8 रुपये दाम मिलेंगे. ओरिएंटल फूल की प्रति छड़ी के दाम ए ग्रेड के 20 और बी ग्रेड के 10 रुपये प्रति छड़ी रहेंगे.

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अमीरों के शौक, नेताओं व फिल्मी हस्तियों की मांग को पूरा करने के लिए यहां के सोसायटी के माध्यम से खरीदने वाली आढ़ती ने एडवांस में ही डेढ़ लाख की राशि सोसायटी के खाते में डाल दी है. फूल मंडी दिल्ली में लाहौल में उत्पादित लिलियम प्रजाति के ओरिएंटल और एशियाटिक की काफी डिमांड है. रोहतांग टनल खुल जाने के बाद लाहौल घाटी की वादियां फूलों से महकने के साथ ही किसानों की आय में भी बड़ा इजाफा कर सकती हैं.

व्यापारी द्वारा फूलों की बुकिंग सीधे खेतों से की जा रही है.

पट्टन वैली फ्लोरीकल्चर सोसायटी के अध्यक्ष पीएल ठाकुर ने कहा कि दूसरी फसलों के मुकाबले किसान इसमें अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं. सबसे खास बात है कि फूल निर्यात और इसकी पैकिंग का खर्चा भी आढ़ती ही उठाते हैं.

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