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आशा कुमारी ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- अध्यापकों के बोलने पर पहरा लगाना गलत

आशा कुमारी ने कहा कि जयराम सरकार ने अध्यापकों के बोलने पर पहरा लगा दिया है जब संविधान ने हमारे बोलने पर पहरा नहीं लगाया तो जयराम सरकार का ये फैसला तुगलकी फरमान जैसा है. आशा कुमारी ने जयराम सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार अपने इस तुगलकी फरमान को वापस ले, अन्यथा सरकार के लिए अच्छा नहीं होगा.

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Published : Apr 30, 2021, 7:35 PM IST

mla asha kumari.
विधायक आशा कुमारी

चंबा: कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेत्री और 6 बार से विधायिका आशा कुमारी ने प्रदेश की जयराम सरकार पर जमकर हमला बोला है. आशा कुमारी ने कहा कि भारतीय संविधान ने बोलने की आजादी देश के हर नागरिक को दी है लेकिन हाल ही में प्रदेश सरकार ने अध्यापकों के सरकार के खिलाफ बोलने पर मनाही की है. यानी सीधे सीधे शब्दों में कहें तो सरकार का विरोध उनके संगठन नहीं कर सकते हैं.

आशा कुमारी ने कहा कि जयराम सरकार ने अध्यापकों के बोलने पर पहरा लगा दिया है जब संविधान ने हमारे बोलने पर पहरा नहीं लगाया तो जयराम सरकार का ये फैसला तुगलकी फरमान जैसा है उन्होंने कहा कि हर सरकार में अध्यापकों के अपने संगठन होते हैं जो अपनी बात रखते थे, लेकिन सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करना कि कोई भी अध्यापक सरकार के खिलाफ नहीं बोलेगा. एक तरह से लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करना है.

वीडियो.

आशा कुमारी की सरकार को चेतावनी

आशा कुमारी ने जयराम सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार अपने इस तुगलकी फरमान को वापस ले, अन्यथा सरकार के लिए अच्छा नहीं होगा. आशा कुमारी की मानें प्रदेश में बहुत सारे विभाग हैं जो अपनी मांगों को लेकर सरकार से मिलते हैं उनके कार्य होने पर सरकार की तारीफ भी करते हैं, लेकिन यहां तो ऐसा फरमान जयराम सरकार ने जारी कर दिया है कि आपके बोलने पर भी पहरा है. इसेबर्दाशत नहीं किया जाएगा सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है जो शर्मनाक है

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क्या कहती हैं डलहौजी की विधायिका आशा कुमारी?

वहीं, दूसरी ओर डलहौजी से कांग्रेस पार्टी की विधायक आशा कुमारी में जयराम सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि सरकार ने एक आदेश पारित किया है जिसमें अध्यापकों को सरकार के खिलाफ नहीं बोलना होगा. यानी जो बोलने की आजादी संविधान ने हम सभी को दी है उसको सरकार ठेंगा दिखा रही है. उन्होंने कहा कि हर सरकार में सभी कर्मचारियों के संगठन होते हैं और वह अपनी बात सरकार तक पहुंचाते हैं लेकिन जिस तरह से यह सरकार कर्मचारी के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और तुगलकी फरमान जारी कर रही है. वह कहीं न कहीं सरकार पर सवाल खड़े करती है.

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