शिमला: हिमाचल प्रदेश को देश का ऊर्जा राज्य कहा जाता है. हिमाचल में जल विद्युत परियोजनाओं की शानदार परंपरा है. जरूरत के समय देश को रोशनी देने वाले ऊर्जा राज्य हिमाचल में केंद्र सरकार के विद्युत संशोधन अधिनियम (Electricity Amendment Act of the Central Government) का विरोध हो रहा है. उल्लेखनीय है कि उक्त अधिनियम इन दिनों सदन के शीतकालीन सत्र में चर्चा के लिए प्रस्तावित है. हिमाचल में इस अधिनियम का विरोध हो रहा है. देश के अन्य राज्यों की तर्ज पर हिमाचल के बिजली बोर्ड कर्मचारी भी विरोध स्वरूप फरवरी 2022 में देशव्यापी धरना देंगे.
यहां जानना दिलचस्प है कि हिमाचल प्रदेश जो खुद ऊर्जा राज्य कहलाता है, में इस संशोधन अधिनियम का विरोध (Electricity Amendment Act in Himachal) क्यों हो (Opposition to the Electricity Amendment Act) रहा है. विस्तार में जाने से पहले हिमाचल में ऊर्जा क्षेत्र को संक्षिप्त में समझना जरूरी है. पहाड़ी राज्य में छोटी-बड़ी कई जल विद्युत परियोजनाएं हैं. यहां सतलुज जल विद्युत परियोजना बेहतरीन काम के कारण पूरी दुनिया में चर्चित है. हिमाचल के पास 27 हजार मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन (Total power generation in Himachal) की क्षमता है.
अभी करीब 11 हजार मेगावाट का उत्पादन हो रहा है. हिमाचल में 160 के करीब (TOTAL POWER PROJECTS IN HIMACHAL) जल विद्युत परियोजनाएं है. अभी 63 परियोजनाओं पर काम चल रहा है. एक दशक में सरकार का लक्ष्य दस हजार मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन का है. हिमाचल में बिजली क्षेत्र की धुरी एचपी स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (HP State Electricity Board) है. इस बोर्ड में 19 हजार कर्मचारी और 30 हजार से अधिक पेंशनर्ज हैं. हिमाचल में देश के अन्य राज्यों के मुकाबले उपभोक्ताओं के लिए बिजली सस्ती है.
विभिन्न स्तरों पर हिमाचल में अधिकतम साढ़े तीन रुपए प्रति यूनिट बिजली उपभोक्ताओं को दी जा रही है. औद्योगिक क्षेत्र में यह सीमा साढ़े चार रुपए प्रति यूनिट तक है. केंद्र सरकार ऊर्जा के क्षेत्र में कुछ बदलाव करना चाहती है. इसके लिए विद्युत संशोधन अधिनियम 2021 (Electricity Amendment Act 2021) लाया गया है. अधिनियम को लाने के पीछे मंशा (What is Electricity Amendment Act) है कि आम जनता और उपभोक्ताओं को सस्ती और निर्बाध बिजली मिले. केंद्र व राज्य सरकारों ने इसके लिए स्टेक होल्डर्स से सुझाव भी मांगे. देश का इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 (Electricity Act 2003) संशोधित रूप में लाया जा रहा है. इसमें बिजली वितरण यानी डिस्कॉम के लिए भी मंच है.
दरअसल विरोध इसी बात पर हो रहा है. हालांकि एक्ट में संशोधन पहले भी हुए हैं, लेकिन इस बार विरोध ज्यादा है. हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड (Electricity Board in Himachal Pradesh) की कर्मचारी यूनियन के महासचिव हीरा लाल वर्मा का कहना है कि इस अधिनियम के प्रस्ताव को तैयार करते समय टेक्नोक्रेट्स की मदद और सलाह नहीं ली गई. यह सीधे-सीधे निजीकरण की राह में बड़ा कदम है.