पानीपत: अक्सर आपने देखा होगा कि पीर फकीरों की दरगाह पर नीले और हरे रंग की चादरें चढ़ाई जाती हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि पानीपत जिले में एक दरगाह ऐसी है जहां खाकी रंग की चादर और पुलिस की वर्दी चढ़ाई जाती है. पानीपत और जींद जिले की सीमा पर सफीदों कस्बा पड़ता है. यहीं पर है पीर सबल सिंह बाबरी दरगाह (peer sabal singh babri dargah in panipat). ये क्षेत्र सफीदों धाम के नाम से भी जाना जाता है.
पीर सबल सिंह बावरी दरगाह की मान्यता है कि यहां आने वाले लोगों की हर मुराद पूरी होती है. कहा जाता है कि सबल सिंह बावरी अपने पांच भाईयों के साथ हरियाणा के मुरथल में रहते थे. पांच भाईयों ने पड़ोस में रहने वाली ब्राह्मण की लड़की शाम कौर को अपनी धर्म बहन बना लिया. कहा जाता है कि मुगलों ने बुरी नियत से पांच भाईयों की धर्म बहन शाम कौर को उठा लिया. ये देख पांचों भाई आग बबूला हो गए. जब इसके बारे में सबल सिंह बावरी को पता चला तो उन्होंने अकेले ही मुगलों से टक्कर ली.
सबल सिंह अपनी बहन को मुगलों के चंगुल से आजाद करवा कर अपने साथ मुरथल ले गए. जिसके बाद वो मुगलों से बचते हुए सफीदों पहुंचे. यहां सबल सिंह ने पीर अस्तबली के स्थान पर शीश झुकाया और उनसे मदद मांगी. तब पीर अस्तबली ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा कि तुम पुलिस की वर्दी पहनकर इन मुगलों के साथ युद्ध करो. पीर अस्तबली के कहने पर सबल सिंह बावरी ने पुलिस की वर्दी में मुगलों के साथ लड़ाई की. आखिर में वो मुगलों के वार से वीरगति को प्राप्त हो गए.