पलवल: हथीन के गांव मिंडकौला में नियमों और आमजन की सुरक्षा को ताक पर रख जर्जर घोषित भवन में प्रसूति केंद्र और स्वास्थय केंद्र चलाया जा रहा है. साल 1969 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री खुर्शीद अहमद ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का शुभारंभ किया था, लेकिन करीब ढाई वर्ष पहले ही ये प्राथमिक स्वास्थय केंद्र पूरी तरह से जर्जर हो चूका है. बावजूद इसके जर्जर घोषित इस इमारत में आमजन की सुरक्षा को दांव पर लगाकर अभी भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा यहां स्वास्थ्य केंद्र चलाया जा रहा है.
स्वास्थ्य केंद्र की दीवारों और छत से जगह-जगह प्लास्टर गिरता रहता है, लेकिन डॉक्टरों, स्टाफ नर्स और तीमारदारों की जान की फिक्र ना तो स्वास्थ्य विभाग को है और ना ही हरियाणा सरकार को है. इस स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली के ये हालात तो तब हैं जब प्रदेश की सत्ता में काबिज भाजपा का हथीन विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रवीण डागर इसी गांव के निवासी हैं. फिर भी किसी को कोई परवाह नहीं है.
स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बैठने के लिए जगह ना होने के कारण रिहायशी क्वार्टर में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को बैठाने की व्यवस्था की हुई है. जिसके कारण मजबूरी वश जर्जर पड़े रिहायशी क्वार्टर में स्टाफ जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं. मंगलवार को जब हमारी टीम ने प्राथमिक केंद्र का निरीक्षण किया तो पता चला कि केंद्र पर कोई चिकित्सा अधिकारी भी मौजूद नहीं था.
स्वास्थ्य केंद्र भी स्टाफ नर्स के भरोसे चल रहा है. पूछने पर पता चला कि एक डॉक्टर की ड्यूटी लगी हुई थी, लेकिन जिला अस्पताल में कोविड-19 में ड्यूटी लगी होने से तीन दिन में एक बार ही केंद्र पर आते हैं. आपातकाल में मरीजों को हथीन या पलवल लेकर जाने को ग्रामीण मजबूर हैं.
'अब तक नहीं हुआ समस्या का समाधान'
अपने बच्चे का इलाज कराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आए गांव मिंडकौला निवासी सहदेव ने बताया की इस परिसर की पूरी बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, जो कभी भी किसी की जान ले सकती है. उन्होंने बताया की जिस डॉक्टर की यहां ड्यूटी लगी हुई है वो ज्यादातर यहां आते ही नहीं हैं और आते भी हैं तो कोई टाइम नहीं है. उन्होंने बताया की पिछले कई वर्षों से प्रसूति वार्ड ऐसी ही जर्जर हालात में पड़ा हुआ है. कई बार आवाज उठाने के बाद भी इस विकट समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ.