भिवानी: प्रदेशभर में चल रहे करीब छह हजार गैर मान्यता व अस्थायी मान्यता वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई करने में शिक्षा विभाग नाकाम रहा है. इसी को लेकर स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव अग्रवाल के माध्यम से इन स्कूलों के खिलाफ बच्चों की सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट में शिकायत दी है.
2017 में लगाई थी याचिका
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि हरियाणा में शिक्षा नियमावली को ताक पर रखकर करीब छह हजार गैर मान्यता व अस्थायी विद्यालय चल रहे हैं. इन स्कूलों के खिलाफ 9 अक्तूबर 2017 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगाई थी.
कोर्ट में हरियाणा सरकार का जवाब
जिसके बाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया तो हरियाणा सरकार की तरफ से 24 जुलाई 2018 से लेकर अब तक पांच शपथ पत्र हाई कोर्ट में दिए जा चुके हैं, जिसमें सरकार की तरफ से ये स्पष्ट किया जा चुका है कि इन स्कूलों को शिक्षा विभाग बंद कराएगा.
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार. ये भी पढ़ें-मौसम विभाग का दावा: रबी फसलों और भूजल स्तर के लिए ये बरसात लाभकारी'
अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहे हैं स्कूल'
सरकार की तरफ से साफ कहा गया कि जो नियम पूरे करेंगे उन्हें स्थायी मान्यता देगा, लेकिन इसके बावजूद जिला स्तर पर शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत से ये फर्जी स्कूल न केवल धड़ल्ले से चल रहे हैं, बल्कि शिक्षा सत्र 2020-21 के लिए बच्चों के दाखिले भी नियमों को ताक पर रखकर करने में जुटे हैं.
'सरकार और शिक्षा विभाग स्कूलों को बंद करने में नाकाम रहा है'
बृजपाल परमार ने हाई कोर्ट में दी शिकायत में बताया कि इन सभी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के भी कोई मापदंड नहीं है. जबकि प्रदेश के कई ऐसे विद्यालयों में दर्दनाक हादसे भी हो चुके हैं, जिनमें बच्चों की जान भी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद सरकार और शिक्षा विभाग इन फर्जी स्कूलों को बंद कराने में नाकाम रहा है.
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन की तरफ से हाईकोर्ट में लगाई गई है, जिसमें जल्द ही सुनवाई होगी. हाई कोर्ट में संगठन ने ये बात मजबूती से रखी है कि शिक्षा नियमों को पूरा नहीं कर चलाए जा रहे स्कूलों में सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं हैं, जिससे लाखों बच्चों की जान पर भी जोखिम बना है.