चंडीगढ़ःहरियाणा में शुरू से ही राजनीतिक परिवारों का बोलबाला रहा है लेकिन पिछली बार बीजेपी ने कई राजनीतिक परिवारों को सत्ता से बेदखल कर दिया. लेकिन इस जुगत कई राजनीतिक परिवार उनके साथ भी आ गए. जैसे राव इंद्रजीत सिंह और बीरेंद्र सिंह का परिवार. ये दोनों ही कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए हैं. इसके अलावा कांग्रेस में तो परिवारों का पुराना इतिहास है और इस बार भी उनके कई नेता अपने बेटों के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं लेकिन बीजेपी में भी ये मांग तेजी से उठ रही है. इसके अलावा इनेलो और जेजेपी तो हैं ही पारिवारिक पार्टियां.
बीजेपी में ये हैं पारिवारिक टिकट के दावेदार
बीरेंद्र सिंह अपनी पत्नी के लिए मांग रहे टिकट!
चौधरी बीरेंद्र सिंह अपने बेटे को संसद पहुंचा चुके हैं और उनकी पत्नी भी उचाना से मौजूदा विधायक हैं लेकिन बीजेपी की सख्ती के बाद से उन्हें थोड़ी फिक्र हुई है और वो अपनी पत्नी को फिर से विधानसभा भेजना चाहते हैं. हालांकि खबरें ये भी हैं कि उनकी पत्नी को मौजूदा विधायक होने का फायदा मिल सकता है और बीजेपी उन्हें टिकट दे सकती है.
राम बिलास शर्मा अपने बेटे के लिए मांग रहे टिकट!
हरियाणा में बीजेपी के सबसे पुराने नेताओं में से एक रामबिलास शर्मा भी चाहते हैं कि उनके पुत्र गौतम शर्मा को इस विधानसभा चुनाव में दो-दो हाथ करने का मौका मिले. लेकिन बीजेपी की वंशवाद के खिलाफ चली आ रही राजनीति और हरियाणा में चल रहे परिवारवाद के खिलाफ उनकी मुहिम आड़े आ रही है.
कविता जैन अपने पति के लिए टिकट चाहती हैं!
मनोहर कैबिनेट में इकलौती महिला मंत्री रही कविता जैन अपने पति राजीव जैन के लिए टिकट की चाहत रखती हैं. राजीव जैन ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ काम भी किया है लेकिन फिर भी वही बीजेपी की राजनीतिक लाइन उनके टिकट के आड़े आएगी और उम्मीद कम ही है कि बीजेपी अपने वंशवाद वाले हथियार को कमजोर करना चाहे. बाकी सब बीजेपी आलाकमान के रुख पर निर्भर है.
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राव इंद्रजीत सिंह अपनी बेटी कि लिए टिकट चाहते हैं!
राव इंद्रजीत सिंह अपनी बेटी आरती राव के लिए इस बार टिकट की चाहत रखते हैं. वो तो काफी लंबे समय से अपनी बेटी के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं लोकसभा चुनाव में भी एक बार बात चली थी कि राव इंद्रजीत सिंह अपनी बेटी को मैदान में उतारना चाहते हैं लेकिन एक परिवार एक टिकट की बीजेपी की नीति तब भी उनके आड़े आई थी क्योंकि वो खुद भी इलेक्शन लड़ना चाहते थे. लेकिन विधानसभा चुनाव में भी उनकी राह आसान नहीं है क्योंकि बीजेपी की नीति अभी भी उनके सामने पहाड़ समान खड़ी है.