कोविड-19 के चलते उत्पन्न परिस्थितियों का असर पुरुषों के यौन स्वास्थ्य पर काफी नकारात्मक रूप से पड़ा है। विशेष तौर पर कोरोना की दूसरी लहर के चलते बड़ी संख्या में हुई जनहानि ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर एक अलग ही प्रकार का असर डाला है। चिकित्सकों के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य मे विकृतियां व्यक्ति की सेक्सुअल हेल्थ यानी उनके यौन स्वास्थ्य को भी काफी ज्यादा प्रभावित करती हैं। इस बात की पुष्टि कोरोना काल में विशेष तौर पर पुरुषों में बढ़ी सेक्सुअल हेल्थ संबंधी समस्याओं के आंकड़े करते हैं।
हार्मोन्स में असंतुलन
एन्ड्रो केयर एण्ड एन्डरोलॉजी संस्थान हैदराबाद के एन्डरोलॉजिस्ट डॉ राहुल रेड्डी बताते है की लॉक डाउन के दूसरे चरण के बाद से ही चिकित्सकों के पास यौन समस्याओं को लेकर सलाह मांगने वाले पुरुषों की संख्या बढ़ी है | जिनमें से ज्यादातर पुरुष यौनेच्छा में कमी और आंशिक तौर पर इरेकटाईल डिसफंगक्शन (नपुंसकता) की समस्या का सामना कर रहें है। डॉ रेड्डी बताते हैं की लॉक डाउन के चलते अनुशासन हीन हुई दिनचर्या तथा जीवन शैली ने पुरुषों की शारीरिक समर्थता को काफी ज्यादा प्रभावित किया है। व्यायाम का अभाव, खाने में असंतुलन, अल्कोहल के ज्यादा सेवन जैसी कई अस्वस्थ आदतों तथा अत्यधिक मानसिक दबाव के कारण बड़ी संख्या में पुरुषों में सेक्स हार्मोन टेस्टोंस्टेरॉन में कमी देखने में आ रही है। यही नहीं इन परिस्थितियों के चलते यौन इच्छा में कमी लाने वाले प्रोलेक्टिन का स्तर भी प्रभावित हो रहा है।
हालांकि देश के ज्यादातर हिस्सों में लॉकडाउन धीरे-धीरे खुलने लगा है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान ज्यादा समय तक घर के अंदर रहने वाले पुरुषों में विटामिन डी सहित कई जरूरी पोषक तत्व की कमी देखने में आई है |
मानसिक स्वास्थ्य से प्रभावित होती है यौनिक समस्याएं
वरिष्ठ मनो चिकित्सक डॉ वीना कृष्णन भी वर्तमान परिस्थतियों में पुरुषों में इरेकटाईल डिसफंगक्शन तथा कामेच्छा में कमी के लिए काफी हद तक अस्वस्थ जीवन शैली और मानसिक तनाव को जिम्मेदार मानती हैं | वे बताती हैं की कोरोना के चलते लोगों के आपसी रिश्तों तथा सामाजिक व्यवहार दोनों पर असर पड़ा है। संक्रमण फैलने के डर से दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलना जुलना न होने , त्यौहार-उत्सव और व्यवहार जैसी सामाजिक आयोजनों में शामिल ना हो पाने तथा आर्थिकअनिश्चितता का असर उनके व्यवहार में उदासीनता का कारण बन रहा है, और इसका असर उनके सेक्स जीवन पर भी पड़ रहा है।
बढ़े घरेलू हिंसा के मामले
कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों के आपसी रिश्तों को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। आँकड़े बताते हैं की कोरोना काल के दौरान घरेलू हिंसा पांच गुना तक बढ़ गये हैं। डॉ कृष्णन बताती हैं की घरेलू हिंसा कई प्रकार की हो सकती है जैसे शारीरिक, मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक। कोरोना के चलते बहुत लोगों ने अपनों को खोया, कई लोगों की नौकरी चली गई तथा और भी कई तरह की पारिवारिक दिक्कतों का लोगों को सामना करना पड़ा। नतीजतन लोगों में घबराहट और झुंझलाहट दोनों बढ़ गई। घरेलू हिंसा के मामले बढ़ने के पीछे एक मुख्य कारण इसे भी माना जा सकता है।
अस्वस्थ जीवन शैली ने बढ़ाई समस्याएं
डॉक्टर राहुल रेड्डी बताते हैं की बेहतर यौन स्वास्थ के लिए जरूरी है की व्यक्ति मानसिक तथा शारीरिक रूप से स्वस्थ्य हो। इसलिए जरूरी है कि जहां तक संभव हो दिनचर्या को अनुशासित बनाने का प्रयास किया जाए, भोजन हमेशा ताजा सुपाच्य और पौष्टिक ही ग्रहण किया जाए,और नियमित व्यायाम का अभ्यास किया जाए। लेकिन बहुत जरूरी है कि किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक समस्या महसूस होने पर तत्काल विशेषज्ञ से संपर्क किया जाए।
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