नई दिल्ली: उपराज्यपाल और केजरीवाल सरकार के बीच तकरार कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है. गृह विभाग के रिकॉर्ड के हवाले से दिल्ली सरकार ने पिछले कुछ महीनों में अभियोजन प्रतिबंधों के ऐसे 7 मामलों को एलजी वीके सक्सेना पर अवैध रूप से मंजूरी देने का आरोप लगाया है, जिसने दिल्ली के आपराधिक न्याय प्रणाली को संकट में डाल दिया है.
दिल्ली सरकार का LG वीके सक्सेना पर आरोप: दिल्ली सरकार का कहना है कि उपराज्यपाल द्वारा मौजूदा कानूनों, भारत के संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने का यह एक बड़ा उदाहरण है. आम आदमी पार्टी ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना के फैसलों पर सवाल उठाए हैं कि वह बिना सरकार की सहमति से केस चलाने की अनुमति कैसे दे सकते हैं. पार्टी का आरोप है कि एलजी ने चुनी हुई सरकार को दरकिनार कर सात मामलों में आरोपियों के खिलाफ सीआरपीसी के तहत केस चलाने की अनुमति दी है, जिसकी सरकार निंदा करती है और इसे आपराधिक न्याय प्रणाली के ऊपर संकट बताया है.
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के अनुसार तीन दशकों से भी अधिक समय से राजधानी में सीआरपीसी की धारा 196 के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति देने की शक्तियां चुनी हुई सरकार के पास रही है. लेकिन उपराज्यपाल ने इसकी अनदेखी करते हुए बीते महीनों में सात मामलों में मुकदमा चलाने की अनुमति दी है. इसमें ओमकारेश्वर ठाकुर द्वारा ट्विटर पर मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें नीलाम करने के आरोप का मामला, जेएनयू छात्र संघ की पूर्व नेता शेहला राशिद द्वारा ट्विटर पर भारतीय सेना की छवि खराब करने के आरोप में केस चलाने की अनुमति, अभिषेक मिश्रा द्वारा सोशल मीडिया पर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धर्म के नाम पर दुश्मनी फैलाने के आरोप का मामला, 9 लोगों पर पुरानी दिल्ली के एक मंदिर में पथराव और कांच की बोतल फेंकने के सलाह देने का मामला, जफर इस्लाम खान और भड़काऊ पोस्ट करने के आरोप से जुड़ा मामला और उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों में आरोपी ताहिर हुसैन से जुड़ा मामला शामिल है.
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