नई दिल्ली: 40 वर्षीय रुचि सूरी, जिनके बच्चे स्कूल की पढ़ाई में व्यस्त थे और उनके पति घर से दूर काम करने के लिए गए हुए थे. ऐसे में रुचि के पास बहुत अधिक समय था. साल 2015 अंत की ओर बढ़ रहा था तब उन्होंने 'ज्वेल्स बाय रुचि सूरी' नाम से एक व्यापार को शुरू किया. यहीं से एक साधारण गृहिणी का बॉस बनने का सफर शुरू हुआ.
उनकी पहली प्रदर्शनी के बाद, उनका व्यवसाय बढ़ा और दुनिया के सभी हिस्सों से ग्राहक उनके पास पहुंचने लगे.
न कोई स्टोर और न कोई वेबसाइट और न ही कोई विज्ञापन, इसके बाद भी रुचि का व्यवसाय केवल लोगों के माध्यम से फलने फूलने लगा. अब उनका व्यवसाय फेसबुक और इंस्टाग्राम से भी संचालित होने लगा है.
शायद इन प्लेटफार्मों पर व्यवसाय करने का सबसे चुनौतीपूर्ण पहलू प्रतियोगिता है, जो इसके साथ ही आती है. चूंकि ई-कॉमर्स सभी प्रकार के विकल्प ग्राहकों को प्रदान करता है, इसलिए वह सस्ते बड़े पैमाने पर उत्पादित विकल्पों की तलाश करते हैं. इस कारण ऑनलाइन बिजनेस बढ़ने में समय लगता है.
रुचि ने कहा कि उनकी मुस्तैदी के कारण उनके ग्राहक जल्द ही उनके दोस्त बन गए. चूंकि जीवन की बारीक चीजों से निबटने के लिए उनका अपना एक अंदाज है.
रुचि के पास दिन-प्रतिदिन के संचालन के लिए कोई कर्मचारी नहीं है.
वह खुद ही सब कुछ करती हैं, सोर्सिंग से लेकर पैकेजिंग तक, फोटोग्राफी से लेकर ग्राहकों से बात करने तक. उनके ग्राहकों का ऑर्डर सुरक्षित पहुंच सके यह सुनिश्चित करने के लिए वह खुद बाहर जाने लगीं और ऑर्डर डिलीवर करने लगीं.
उन्होंने कहा कि एक उद्यमी होने के नाते कुछ भी आसान नहीं है, लेकिन जब आपके पास घर की देखरेख करने के लिए एक वित्तीय निवेश होता है, तो मेरे पति मेरे सबसे बड़े गुरु होते हैं.
उन्होंने मुझे सिखाया है कि सही कनेक्शन कैसे बनाएं, नेटवर्क कैसे बनाएं. कुछ दिनों में जब मैंने अपना धैर्य खो दिया, तो उन्होंने मेरी काउंसलिंग की और याद दिलाया कि मुझे हार नहीं माननी चाहिए.