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सिंगापुर के न्यायाधीश ने कहा : हिंदू मंदिर प्रबंधन समिति का मामला 'सबसे बेतुका' - हिंदू मंदिर प्रबंधन समिति

यीशून आवासीय संपत्ति में प्रमुख हिंदू मंदिर पर नियंत्रण को लेकर दो धड़ों के बीच हुई खींचतान का मामला कोर्ट में पहुंच गया है. इस पर हाईकोर्ट के जस्टिस ने इसे दायर की गई व्यर्थ कार्रवाई में से एक कहा है.

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Published : May 27, 2021, 6:48 PM IST

सिंगापुर : सिंगापुर के उपनगर यीशून आवासीय संपत्ति में प्रमुख हिंदू मंदिर पर नियंत्रण को लेकर दो धड़ों के बीच हुई खींचतान का मामला अदालत में पहुंचने के बाद उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने इसे 'दायर की गई सबसे बेतुकी एवं व्यर्थ कार्रवाइयों में से एक कहा है.'

बृहस्पतिवार को एक लिखित फैसले में, न्यायमूर्ति चू हान टेक ने कहा कि श्री महा मरियम्मन मंदिर को लेकर हुए विवाद पर मुकदमा नहीं चलना चाहिए था. 'द स्ट्रेट्स टाइम्स' समाचार-पत्र ने खबर दी कि विवाद खड़ा करने वाले एक धड़े में सुब्रमण्यण करुप्पिया तेवर शामिल हैं जिनकी बहन के कल्याणताई मंदिर की संस्थापक और लंबे वक्त इसकी अध्यक्ष रही हैं.

दूसरे धड़े में प्रबंधन समिति के चार सदस्य शामिल हैं जिन्हें 2017 में कल्याणताई की मौत के बाद निर्वाचित किया गया था. 2017 में बनी इस समिति की वैधता को लेकर विवाद खड़ा हुआ था जिसमें मंदिर के कुछ सदस्य फिर से चुनाव कराने की मांग कर रहे थे.

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सितंबर 2018 में सुब्रमण्यम ने एकतरफा रूप से असाधारण आम बैठक बुलाई जिसमें 40 लोगों ने 11 सदस्यों की समिति को हटाने के पक्ष में और नयी समिति गठित करने के लिए वोट डाले जिसमें उन्हें अध्यक्ष बनाया गया.

मई 2019 में उन्होंने समिति के चार सदस्यों को हटा दिया जिनमें पूर्व के अध्यक्ष एन आनंदराजा और मौजूदा अध्यक्ष आर मगेंद्रन शामिल थे. उन्होंने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह बचाव पक्ष के लोगों को, मंदिर के दस्तावेज एवं संपत्ति, उन्हें सौंपने का आदेश दे.

खबर में बताया गया कि न्यायमूर्ति चू ने सुब्रमण्यम का मामला खारिज कर दिया और कहा कि आम बैठक वैध रूप से नहीं बुलाई गई थी क्योंकि प्रबंधन समिति की मंजूरी नहीं ली गई थी.

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