बेंगलुरु :यह बेंगलुरु शहर के नम्मा की दस साल की लड़की सिंहस्थिता की कहानी है. संकट में घोड़ों की मदद के लिए लाॅकडाउन के समय डॉक्टरों की सेवा लेने के लिए इन्होंने अपने यूट्यूब वीडियो का सहारा लिया और बीमार व संकटग्रस्त घोड़ों की मदद की.
उनकी उपलब्धि के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. समभाव नाम का एक गैर सरकारी संगठन है, जो कि संकट में घिरे घोड़ों की मदद के लिए काम करता है. इस एनजीओ को लॉकडाउन के समय वित्तीय संकट का सामना भी करना पड़ा. संस्था करीब 60 घोड़ों की देखभाल कर रहा है. एनजीओ इन घोड़ों के चारे के लिए भी संघर्ष कर रहा था. उस दौरान सिंहस्थिता ने एनजीओ की चुनौती दूर करने में मदद का फैसला किया. उसने अपने वीडियो के माध्यम से एनजीओ की मदद की. वर्तमान में वह चौथी कक्षा में पढ़ रही है.
सिंहस्थिता को जानवरों से प्यार
सिंहस्थिता कहती हैं कि बचपन के दिनों से ही मैं घोड़ों को देख रही हूं और मुझे घोड़ों से प्यार है. लॉकडाउन के समय मेरे पिता ने मुझसे एनजीओ का दौरा करने और मदद करने के लिए कहा. मैं इन घोड़ों के लिए चारे का इंतजाम करती हूं. मैंने उसी के लिए वीडियो बनाए. मेरे भाई ने भी एक क्रिकेटर की मदद से वित्तीय मदद की. मेरा सपना जॉकी बनने का रहा है. मैं जानवरों को बचाने और संरक्षण के लिए एक एनजीओ शुरू करना चाहती हूं.