नई दिल्ली : देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए जुलाई 2023 से पीएचडी की डिग्री अनिवार्य होगी. यह अनिवार्यता 1 जुलाई 2023 से लागू की जाएगी. तब तक सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति में पीएचडी की अनिवार्यता से राहत प्रदान की गई है.
यूजीसी ने मंगलवार शाम यह अहम निर्णय लिया है. इस संदर्भ में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक फिलहाल कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए पीएचडी डिग्री की अनिवार्यता से 1 वर्ष की छूट प्रदान की गई थी, हालांकि अब निर्णय लिया गया है की है छूट 1 जुलाई 2023 तक जारी रहेगी. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने बताया कि 1 जुलाई 2023 से विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर के पद पर होने वाली सभी नियुक्ति के लिए पीएचडी की डिग्री अनिवार्य होगी.
मंगलवार को लिए गए इस निर्णय के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में भी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए पीएचडी को अनिवार्य नहीं करेगा. सभी शिक्षण संस्थान इस नियम का पालन करेंगे. इससे पहले कुछ विश्वविद्यालयों ने सहायक प्रोफेसर के पद के लिए पीएचडी अनिवार्य कर दी थी.
छूट केवल 30 जून 2023 तक के लिए
शिक्षा मंत्रालय केंद्रीय के मुताबिक विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए पीएचडी की अनिवार्यता अभी नहीं होगी. ऐसे उम्मीदवार जिनके पास पीएचडी की डिग्री नहीं है वह भी असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन यह यह छूट केवल 30 जून 2023 तक के लिए है.
दरअसल कोरोना संकट के चलते कई छात्र समय पर अपनी पीएचडी थीसिस समय पर जमा नहीं करा सके हैं. इसी के चलते यूजीसी नेट पास कर चुके इन उम्मीदवारों ने फिलहाल पीएचडी की अनिवार्यता से छूट देने की मांग की थी. देशभर के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में इस समय शिक्षकों के 6,300 से अधिक पद खाली हैं.