कोलकाता/रांची :कुर्मी समुदाय द्वारा रेल-नाकाबंदी आंदोलन के बाद बुधवार को पश्चिम बंगाल के बांकुरा, पुरुलिया और पश्चिम मिदनापुर के तीन आदिवासी बहुल जिलों में ट्रेन सेवाएं बाधित कर दी गईं. कुर्मी समुदाय अनुसूचित जनजाति श्रेणी के तहत मान्यता की अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग के समर्थन में आंदोलन कर रहा है. उनकी शिकायत यह है कि स्वदेशी जनजातियों के लिए काम करने वाली राज्य सरकार की संस्था पश्चिम बंगाल कल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अभी तक कुर्मियों को आदिम जनजातियों के प्रतिनिधि के रूप में मान्यता नहीं दी है. वहीं झारखंड के रांची में कुड़मी जाति को एसटी का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर लोगों के द्वारा हावड़ा-मुंबई मार्ग के कई स्टेशनों पर प्रदर्शन किया जा रहा है. इस वजह से कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है.
समुदाय के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार को इस मामले में एक व्यापक रिपोर्ट भेजने के लिए संस्थान या राज्य सरकार की अनिच्छा, अनुसूचित जनजाति श्रेणी के तहत कुर्मी समुदाय की मान्यता की प्रक्रिया को बाधित कर रही है. बुधवार की सुबह, समुदाय के सदस्यों ने पुरुलिया में आद्रा और पश्चिम मिदनापुर में खेमासुली जैसे महत्वपूर्ण जंक्शन स्टेशनों पर रेल रोका, जिसके बाद पूरे मंडल में ट्रेन सेवाएं बाधित हो गईं. मंडल में चलने वाली कई ट्रेनें पहले ही रद्द कर दी गई हैं. कुछ मामलों में, कुछ ट्रेनों का रूट या तो डायवर्ट किया गया है या छोटा किया गया है.
अनुसूचित जनजाति के रूप में अपनी पहचान की मांग को लेकर कुर्मी समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा आंदोलन का आज दूसरा दिन है. मंगलवार को, उन्होंने तीन आदिवासी बहुल जिलों के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध कर दिया. पिछली बार सितंबर 2022 में कुर्मियों ने इसी तरह का विरोध प्रदर्शन किया था, जब उन्होंने उन्हीं आदिवासी बहुल इलाकों में रेल-नाकाबंदी आंदोलन का सहारा लिया था.
झारखंड के रांची में कुड़मी जाति को एसटी का दर्जा देने के लिए हावड़ा-मुंबई रेललाइन पर जमे आंदोलनकारी, कई ट्रेनें रद्द