गया:संजय दत्तकी नानीजद्दनबाई हुसैन का जन्म 1892 में बनारस में हुआ था. बिहार के गया से देश की प्रसिद्ध नर्तकी-गायिका रही जद्दनबाई का गहरा संबंध रहा है. जद्दनबाई फिल्म अभिनेता संजय दत्त की नानी थीं. आज भी गया में जद्दनबाई के नाम की हवेली मौजूद है. कहा जाता है, कि इस हवेली में रईसों की महफिल सजती थी और जद्दनबाई की ठुमरी गायन और नृत्य के एक से बढ़कर एक कद्रदान आते थे.
संजय दत्त की नानी और नरगिस की मां थीं जद्दनबाई: जद्दनबाई प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता संजय दत्त की नानी और नरगिस की मां थी. जानकार बताते हैं कि जद्दनबाई की मां दलीपबाई तवायफ थी. जद्दनबाई को विरासत में संगीत नृत्य मिला था. जद्दनबाई जब नृत्य करती थीं, तो राजा रजवाड़े मंत्र मुग्ध हो जाते थे. गया निवासी आज भी शहर की उस रौनक को याद कर खुशी से झूम उठते हैं.
"संजय दत्त की नानी का यह हवेली है. इसमें पहले नृत्य हुआ करता था. नृत्य की क्लास भी चलती थी. बड़ी संख्या में लोग आते थे. मैं इस हवेली को 1986 से देख रही हूं. पहले हवेली काफी अच्छी स्थिति में थी लेकिन अब टूटफूट चुका है."- उर्मिला देवी, स्थानीय
"यह हवेली एक प्रसिद्ध संगीतकार जद्दनबाई का था. जद्दनबाई संजय दत्त की नानी और नरगिस की मां थीं. यह हवेली अब खंडहर बन चुकी है. सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए."- हर्षित अवस्थी, विद्यालय से जुड़े कर्मी
जद्दनबाई की शादी को लेकर अलग-अलग मत: जानकार बताते हैं कि जद्दनबाई की तीन शादियां हुई थीं, जिसमें एक शादी बिहार के गया जिले के रहने वाले शख्स से हुई थी. उस समय दौलतबाग नाम से रजवाड़ा था जो आज का गया का शहर का पंचायती अखाड़ा है. हालांकि, गया में शादी के संदर्भ में अलग-अलग मत भी है, कुछ इसे नहीं भी मानते हैं.
"हवेली खंडहर हो चुका है. जद्दनबाई का ये महल है. मुजरा किया जाता था. सरकार को इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए. जफरद्दुीन से जद्दनबाई ने शादी की थी. उनके कई महलों में से एक ये भी है. इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं"- अनीता देवी, स्थानीय
देश की प्रसिद्ध ठुमरी नृत्यांगना थीं जद्दनबाई :जद्दनबाई का एक महल आज भी गया शहर में मौजूद है. पंचायती अखाड़ा में डायट परिसर में मौजूद यह महल जीर्ण-शीर्ण हालत में है. लेकिन इस महल की यादें जद्दनबाई के नाम से ही चमक उठती है. देश की प्रसिद्ध ठुमरी गायिका जद्दनबाई के इस महल में आने वाले यहां आकर मन्नत मांगते हैं.
मन्नत मांगने आते हैं लोग:इस तरह आज भी लोगों के लिए यह महल जद्दनबाई का एक जिंदा स्वरूप है. लोग यह भी बताते हैं कि इस महल के सामने खड़े होकर मांगी गई मन्नत भी पूरी होती है. इस तरह से जद्दनबाई का महल आज मन्नत पूरी करने वाली एक स्थली के रूप में भी जाना जाने लगा है.
जफर नवाब ने हवेली दी थी गिफ्ट: गया घराने से जुड़े पंडित राजेंद्र सिजुआर शास्त्रीय उप शास्त्रीय गायकी से जुड़े हुए हैं. ये जद्दनबाई के संबंध में काफी कुछ जानकारी रखते हैं. पुराने इतिहास की चीजों पर उनकी अच्छी पकड़ है. गया घराने से जुड़े पंडित राजेंद्र सिजुआर बताते हैं कि जद्दनबाई को जफर नवाब से प्रश्रय मिला. जफर नवाब बड़े संगीत प्रेमी थे. यही वजह है जफर नवाब की हवेलियों के बीच में जद्दनबाई की हवेली आज भी मौजूद है, जो कि उनके द्वारा जद्दनबाई को दी गई थी.