भोपाल।जिंदा इंसानों के लिए राजनीतिक दल तमाम घोषणाएं करते हैं, लेकिन क्या चुनावी साल में राजनीतिक दलों के एजेंडे में मौत के बाद का प्लान भी होगा. इस सवाल पर आप चौंक जाएं इससे पहले ये जान लें कि आपके हरे भरे भोपाल में कब्जों ने कब्रों को भी नहीं छोड़ा है. मुमकिन है कि अगले कुछ सालों में मुस्लिम वर्ग में जीते जी इंसान की सबसे बड़ी फिक्र ये होगी कि मरने के बाद क्या ठीक-ठाक कब्र मिल पाएगी. भोपाल देश दुनिया का पहला शहर होगा जहां कब्र की जमीन तैयार करने मिट्टी जुटाई जा रही है.
दफन के लिए मिट्टी लाइए: सियासी दलों के सामने चुनावी साल में एक अभियान सवाल बनकर खड़ा है. अभियान मिट्टी जुटाने का दफन की मिट्टी बचाने के लिए. भोपाल के नौजवान सैय्यद फैज़ अली और उनके साथियों ने कैम्पेन इसी मकसद से शुरु किया है कि किसी तरह दफन के लिए आ रहे जनाजों को जमीन मिल सके. सैय्यद फैज कहते हैं लोगों को जागरुक होना है ये समझना है कि पक्की कब्रें कैसे लोगों के लिए मुश्किल बन रही है. इसीलिए हमने ये कैम्पेन शुरु किया कि एक तगाड़ी मिट्टी दीजिए ताकि कब्र की जमीन बचाई जा सके, लेकिन क्या लड़ाई इतनी आसान है. फैज कहते हैं इसमें हमें प्रशासन और सियासी दलों की मदद की बहुत जरुरत है. उन्हें सामने आना चाहिए. बाकी ये नौबत आ जाए कि भोपाल में किसी को दफनाने जमीन ही ना मिले, इसलिए हमने मिट्टी मांगे कब्रिस्तान ये अभियान छेड़ा है. हम वक्फ बोर्ड भी गए कि कब्रिस्तान का नामांकन हो सके और अब बड़ा बाग कब्रिस्तान से ये अभियान शुरु करके भोपाल के हर कब्रिस्तान तक जाएंगे.
दफन की दो गज जमीन भी गई कहां: तो कब्रिस्तानों की जमीन गई कहां. आपके इस सवाल का जवाब ये है कि आधी जमीन पर कब्जे की दुकान और मकान बन गए जो ज़मीन बाकी हैं वहां पक्की कब्रों की वजह लाशों को दफनाना मुश्किल हो गया है. ईटीवी भारत जब भोपाल के सबसे पुराने और बड़े बड़ा बाग कब्रिस्तान पहुंचा तो यहां कब्रिस्तान की देखभाल करने वाले अनीस भाई के लफ्ज काबिल ए गौर थे. अनीस भाई ने कहा, इस वक्त अगर कोई नया जनाजा आ जाए तो हमें किसी की कब्र खोदनी पड़ेगी. मुश्किल ये है कि कब्र खोदने में लाठी डंडे निकल आते हैं.