दिल्ली

delhi

कर्नाटक HC ने मैरिज सर्टिफिकेट फर्जी होने का दावा करने पर पति पर लगाया जुर्माना

By

Published : Jul 14, 2023, 1:08 PM IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने तलाक की अर्जी दाखिल करने के बाद मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट फर्जी होने का दावा करने पर पति पर 25000 रुपये का जुर्माना लगाया है. गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए उसने ऐसा किया.

Karnataka HC fined the husband Rs 25000 for claiming that marriage registration certificate was fake after filing for divorce
कर्नाटक HC ने मैरिज सर्टिफिकेट फर्जी होने का दावा करने पर पति पर लगाया जुर्माना

बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उस व्यक्ति पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया जिसने तर्क दिया कि पत्नी को गुजार भत्ता देने से बचने के लिए उसने फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट दिया. उसने फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए आवेदन दायर किया था. यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की अध्यक्षता वाली पीठ ने पारित किया. पीठ ने यह आदेश धारवाड़ जिले के कुंडगोला तालुक के एसएन डोड्डामाने द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की. हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि 30 दिन के भीतर 25,000 रुपये का जुर्माना नहीं भरने पर 200 रुपये प्रतिदिन और अगले 30 दिनों के भीतर जुर्माना नहीं भरने पर 500 रुपये प्रतिदिन जुर्माना लगाया जाएगा.

साथ ही, पीठ ने कहा कि एक बार तलाक की याचिका दायर होने के बाद विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र को नकली नहीं कहा जा सकता है. इस मामले में याचिकाकर्ता सच छिपाकर झूठ बोल रहा है. इस प्रकार, साक्ष्य अधिनियम की धारा 58 के तहत गैर-विवाह की घोषणा नहीं की जा सकती है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का यह व्यवहार दोषपूर्ण है और जुर्माना लगाया जा रहा है.

याचिकाकर्ता के पास विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र है लेकिन प्रामाणिकता पर संदेह है. रिकॉर्ड मौजूद है, लेकिन वैधता पर सवाल उठाया गया है. भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 के अनुसार याचिकाकर्ता की दलील खारिज नहीं की जा सकती. हालाँकि, वह इस संबंध में आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध कराने में विफल रहा हैं. इसलिए कोर्ट ने कहा कि मैरिज सर्टिफिकेट फर्जी को शून्य घोषित नहीं किया जा सकता.

ये भी पढ़ें- साबुन घोटाला मामला: अदालत ने कहा- 'रिश्वत देने वाले पर भी मुकदमा चलना चाहिए'

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि 3 दिसंबर 1998 का विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र एक जाली दस्तावेज है. याचिकाकर्ता और प्रतिवादी (पति-पत्नी) के बीच वैवाहिक संबंध कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है. इस प्रकार, ट्रायल कोर्ट ने पत्नी को भरण-पोषण खर्च देने के आदेश को रद्द करने के आदेश दिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण के मामलों में वैवाहिक संबंधों की गहराई से जांच करने के लिए प्रतिवादी पत्नी के वकील की जरूरत नहीं है. साथ ही याचिकाकर्ता पति ने हुबली के फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दी है. यह कहते हुए पीठ ने याचिका को खारिज कर दी.

ABOUT THE AUTHOR

...view details