अहमदाबाद : गुजरात उच्च न्यायालय ने भरूच जिले में पिछले दिनों एक कोविड-19 अस्पताल में आग लगने की घटना पर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि वह चौकसी में ढिलाई बरतने और ऐसी घटनाओं को टालने में नाकाम रहने के कारण अवमानना की दोषी है. अदालत ने इस संबंध में अपने पूर्व में पारित कई आदेशों का उल्लेख किया.
अदालत की एक खंडपीठ ने महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी के इस जवाब पर हैरानी जताई कि एक ट्रस्ट द्वारा संचालित भरूच वेलफेयर अस्पताल में कोविड -19 केंद्र को प्राधिकारियों को सूचित किए बिना गुपचुप तरीके से स्थापित किया गया था. एक मई को इस केंद्र में आग लगने की घटना में 18 लोग मारे गए थे जिनमें से सोलह मरीज और दो नर्सें थीं .
न्यायाधीश बेला त्रिवेदी और न्यायाधीश भार्गव डी कारिया की पीठ ने कहा कि क्या समिति की रिपोर्ट का मतलब फाइलों में बंद रहना है? इस विनाशकारी आग लगने की घटना के लिए किसी की तो जवाबदेही तय करनी होगी.
कोर्ट ने कहा सरकार केवल कागज जमा करती है, सब कुछ केवल कागज पर ही रह जाता है. महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने कहा कि रिपोर्ट को फाइलों में बंद नहीं रखा जाता है कई बार, रिपोर्टों पर चर्चा की जाती है. जहां तक भरूच की घटना का सवाल है, यह पता लगाने के लिए पूछताछ जारी है कि कौन जिम्मेदार था.
उच्च न्यायालय सरकार के जवाब से खुश नहीं था. कोर्ट ने सरकार पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आप केवल कागजात जमा करें जबकि शपथ पत्र पर कुछ भी नहीं है, सब कुछ सिर्फ कागज पर है. हम केवल इतना पूछना चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?