नई दिल्ली : सर्दियां आते ही दिल्ली सहित अनेक शहरों में प्रदूषण (pollution in the city) की परत छाने लगती है और इसके कारण बच्चों, बुजुर्गों सहित लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में इस समस्या से निजात पाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं और क्या इन प्रयासों से जमीनी स्तर पर फर्क देखने को मिलेगा?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board-CPCB) के सदस्य सचिव प्रशांत गार्गव ने प्रदूषण से प्रभाव को ध्यान में रखकर की गई तैयारियों के बारे में कहा कि दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या महत्वपूर्ण मुद्दा है और इस दृष्टि से हम स्थितियों को बेहतर बनाने के लिये अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं. दिल्ली में 40 स्थानों पर वायु गुणवत्ता की वास्तविक आधार पर निगरानी की जा रही है तथा निर्माण स्थलों पर धूल कणों के निवारण की व्यवस्था की जा रही है. उद्योगों ने पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को अपनाया है, स्मॉग टावर स्थापित करने पर काम हो रहा है तथा पेट्रोल पम्पों पर वाष्प शोधन प्रणाली स्थापित की गई है.
दिल्ली में प्रदूषण के 'हॉट स्पाट' (मुख्य स्थलों) की पहचान की गई है क्योंकि किसी भी शहर में प्रदूषण का स्तर हर जगह समान नहीं होता है. ऐसे में इन हॉट स्पाट की पहचान करने से हमें प्रभावी कदम उठाने में मदद मिलेगी. दिल्ली में प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए सूक्ष्म स्तर पर कार्यक्रम तैयार किये गए हैं. हम सभी एजेंसियों के साथ मिलकर सक्रियता से काम कर रहे हैं. हम उम्मीद करते है कि इन प्रयासों से आने वाले समय में स्थितियां और बेहतर होंगी.
देश में वायु गुणवत्ता आकलन के लिए नीतिगत एवं अन्य स्तर पर उठाए जा रहे कदम के बारे में उन्होंने कहा कि अभी देश में 139 शहरों के लिए वायु गुणवत्ता सूचकांक जारी किये जा रहे हैं और इसे बेहतर बनाने की दिशा में लगातार काम हो रहा है. हम मानकों को सुदृढ़ बनाने पर काम कर रहे हैं. केंद्र सरकार की ओर से कई कदम उठाये गए तथा आईआईटी, सीएसआईआर लैब तथा राज्य इंजीनियरिंग कॉलेजों की सहभागिता से वायु गणवत्ता को बेहतर बनाने के उपाए किये जा रहे हैं.
वायु प्रदूषण को लेकर देश की स्थिति