कोलकाता : पश्चिम बंगाल में आए चक्रवाती तूफान 'अम्फान' से 80 से अधिक लोगों की मौत हो गई और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं. कोरोना महामारी और लॉक डाउन के कारण पहले ही बेरोजगारी और तंगी से जूझ रहे लोगों के सामने अब जो बचा था, उसे अम्फान ने छीन लिया. ऐसी परिस्थिति में उनके सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
स्वराज अभियान के संयोजक योगेंद्र यादव और महासचिव अविक साहा ने इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए कई ऐसे सुझाव सामने रखे हैं, जिनके माध्यम से लोगों को मदद की जा सकती है. बतौर अविक साहा बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र और बाकी प्रभावित क्षेत्रों के भी किसानों के सामने सबसे बड़ा संकट है, क्योंकि आने वाले तीन वर्षों तक खेती का काम प्रभावित हो सकता है.
तूफान के कारण खेतों और नदी तालाबों में समुद्री खाड़ा पानी जम चुका है, जो खेतों की उपज को प्रभावित करेगा. जमीन में नमक के प्रभाव से उसकी उर्वरक क्षमता बहुत कम हो जाएगी और खाड़े पानी के दुष्प्रभाव को जाने में समय लगेगा. आज किसानों के सामने बाढ़ की समस्या नहीं बल्कि दूषित पानी खेत में जमा होने की समस्या है, जो बिना सरकारी मदद के बाहर नहीं निकाला जा सकता.
अविक साहा का कहना है कि सरकार को किसानों के खेत से खारे पानी को बाहर निकालने का प्रबंध करना चाहिए अन्यथा सामान्य रूप से खेतों में उनकी वास्तविक उर्वरक क्षमता वापस आने में तीन साल से भी ज्यादा समय लग सकता है और इतने समय तक कृषि पर आधारित किसान नुकसान नहीं झेल पाएंगे. ऐसे में खेती किसानी बर्बाद हो जाएगी.
कुछ ऐसी ही तस्वीर मतस्य पालन पर आधारित किसानों की भी है. मीठे पानी में पलने वाली मछलियां नदियां और तालाबों में नमक युक्त पानी घुस जाने से मर रही हैं और ऐसी परिस्थिति में मछली पालन में लगे किसानों के हालात भी बदतर हो गई हैं. उन्हें तुरंत मदद की आवश्यकता है.