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उत्तराखंड : POCSO कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा, हाई कोर्ट ने किया दोष मुक्त

उत्तराखंड के ऋषिकेश में पोक्सो कोर्ट ने पहले साक्ष्यों के आधार पर दुष्कर्म और हत्या का दोषी मानते हुए सरदार परमानंद सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन जब ये मामला हाई कोर्ट में गया तो खंडपीठ ने साक्ष्यों के अभाव में परमानंद सिंह को दोष मुक्त कर दिया है.

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Published : Nov 7, 2019, 1:23 PM IST

हाई कोर्ट ऑफ उत्तराखंड

नैनीताल : उत्तराखंड के ऋषिकेश में रेप और हत्या के आरोप में पोक्सो कोर्ट ने सरदार परमानंद सिंह को फांसी की सजा सुनवाई थी, लेकिन नैनीताल हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपी को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है.

बता दें कि पिछले साल ऋषिकेश में एक गुरुद्वारे के सेवादार सरदार परमानंद सिंह पर आरोप लगा था कि उन्होंने नेपाली मूल की दो नाबालिग बच्चियों की रेप के बाद हत्या कर दी थी.

इस मामले में पुलिस ने परमानंद सिंह को गिरफ्तार भी किया था. देहरादून की पोक्सो कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी. जिसके बाद साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने परमानंद सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी.

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वहीं, प्रावधान है कि निचली अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाने के बाद उसको स्वीकृति के लिए हाईकोर्ट की खंडपीठ के लिए भेजा जाता है.

इसी के आधार पर आरोपी को फांसी की सजा देने के बाद सजा की स्वीकृति के लिए नैनीताल हाईकोर्ट भेजा गया.

नैनीताल हाई कोर्ट के न्यायाधीश आलोक सिंह और न्यायाधीश रविंद्र मैथानी की खंडपीठ ने मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण वशिष्ठ को न्याय मित्र नियुक्त किया और मामले में रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा था.

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उधर, न्याय मित्र ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी. जिसकी बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई. जिसमें हाई कोर्ट के न्यायाधीश आलोक सिंह और न्यायाधीश रविंद्र मैथानी की खंडपीठ ने रेप के बाद हत्या के मामले दोषी आरोपी सेवादार परवान सिंह को सबूतों के आधार पर दोष मुक्त करार दिया है. साथ ही कोर्ट ने मामले की जांच कर रहे जांच अधिकारी के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए है.

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