रांची:भारत की आजादी के बाद बदलते समय और प्रदेशों की मांग के आधार पर कई बार अलग-अलग राज्यों का गठन किया गया है. इन्हीं में से एक राज्य है झारखंड. आदिवासी बहुल इलाके के विकास को लेकर विशेष ध्यान देने की योजना के साथ झारखंड को आज से 20 साल पहले भारत का 28वां राज्य बनाया गया. झारखंड गठन के 20 साल पूरे होने के मौके पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने राज्यवासियों को शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि इस राज्य का देश के विकास में उल्लेखनीय योगदान रहा है.
पीएम मोदी ने भी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं. पीएम मोदी ने झारखंड के लोगों के विकास, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना भी की.
इस मौके पर पीएम मोदी ने बिरसा मुंडा को भी याद किया. अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि भगवान बिरसा गरीबों के सच्चे मसीहा थे, जिन्होंने शोषित और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए जीवनपर्यंत संघर्ष किया. उनके प्रयास देशवासियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे.
गौरतलब है कि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 के अंतिम दशक में आदिवासी किसान के गरीब परिवार में हुआ था. खूंटी के सुदूरवर्ती उलिहातू गांव में जन्मे बिरसा मुंडा ऐसे महानायक थे, जिन्होंने 19वीं शताब्दी में आदिवासियों को एकजुट कर उन्हें जागरूक किया. अंग्रेजों से लोहा लेने में सबका नेतृत्व किया.
आज भी आदिवासियों के सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात बिरसा मुंडा को ही माना जाता है. बाद में साल 2000 में झारखंड की स्थापना धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती यानी 15 नवंबर के दिन की गई.
15 नवंबर, 2000 को जब अलग राज्य के रूप में झारखंड अस्तित्व में आया, तो ऐसा लगा कि यहां के गरीब आदिवासियों के सपने अब जल्द पूरे हो जाएंगे. प्रकृति के खजाने के बीच बैठे वंचितों की तकदीर बदल जाएगी. बिरसा के सपनों के झारखंड ने आकार तो लिया लेकिन क्या वो साकार हुए. ये समझने के लिए चलिए कुछ आंकड़ों पर नजर डालते हैं.
बिहार से अलग होने के बाद तत्कालीन सूबे की सरकार ने वित्तीय वर्ष 2001-02 के लिए 7,174.12 करोड़ रुपये के बजट का खाका तैयार किया. तब झारखंड में प्रति व्यक्ति आय 10 हजार 451 रुपये हुआ करती थी. सरकार की ओर से आर्थिक, सामाजिक और कई क्षेत्रों में लगातार विकास किया गया. नतीजतन प्रति व्यक्ति आय में भी लगातार इजाफा होता गया. और सूबे में विकास का ग्राफ ऊपर और गरीबी का सूचकांक नीचे होता गया.
लोगों के पलायन का सिलसिला
2000 में जब अलग झारखंड बना तो राज्य में कुल 18 जिले थे जो अब बढ़कर 24 हो चुके हैं. 2001 में झारखंड का बजट 4800.12 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 86 हजार 370 करोड़ रुपये हो गया है. इन सब के बावजूद राज्य में 39.1 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे जिंदगी गुजार रहे हैं. बेरोजगारी बढ़ने की दर 3 (3.1%) फीसदी से ज्यादा है. राज्य में उद्योग के कई अवसर होने के बावजूद नौकरी की तलाश में लोगों के पलायन का सिलसिला मुसलसल जारी है.
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