रायपुर/हैदराबाद : प्रथम पूज्य लंबोदर महाराज समस्त संकटों को हरने वाले और समस्त बाधाओं से विजय दिलाने वाले माने जाते हैं. यही वजह है कि भगवान गणेश को शुभकर्ता कहा गया है. भगवान गणपति हर बाधाओं और विघ्नों को हर लेते हैं. भगवान गणेश की उपासना से जातक को सुख की प्राप्ति होती है. धर्मगुरुओं के मुताबिक भगवान गणेश हमें दु:ख से निकालकर सुख प्रदान करते हैं. भगवान श्री गणेश प्रथमेश माने जाते हैं.जन्म संस्कार से लेकर विवाह और फिर मृत्यु के संस्कार सब में भगवान गणेश की पूजा और उपासना की जाती है. संकष्टी चतुर्थी के दिन जात को साफ कपड़े पहनकर और भगवान गणेश को नवीन वस्त्र अर्पित कर पूजा अर्चना करनी चाहिए. इससे सौभाग्य में वृद्धि होगी. 16 जुलाई 2022 को गजानन संकष्टी चतुर्थी का पर्व है. आइए जानते हैं कि इस दिन कैसे पूजा करें
gajanana sankashti chaturthi 2022: संकष्टी चतुर्थी में ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा, हर मनोकामना होगी पूरी ! - प्रथम पूज्य लंबोदर महाराज
देवों में प्रथम पूज्य भगवान गणेश भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं. गणेश भगवान की पूजा अगर विधिपूर्वक की जाए तो जातक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है. गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत कैसे करें. इसे जानने के लिए पढ़िए ये रिपोर्ट
इस मुहूर्त में करें पूजा: 16 जुलाई 2022 को शनिवार दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी. यह तिथि 17 जुलाई को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगी. पंडितों के मुताबिक 16 जुलाई को चंद्रोदय होने के कारण इस दिन गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत श्रद्धालु रख सकते हैं.
ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा: धूप, दीप,अगरबत्ती से गणेश जी की पूजा (worship of ganesh) की जाती है. दूब, फूलों और फूलों की माला भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं. गणपति महाराज को लड्डू काफी प्रिय हैं. इनका भोग लगाकर भगवान गणेश की अराधना करें. गणपति महाराज की आरती करें. जिन जातकों को लोन अधिक हो गया है. उन्हें गणेश ऋणमोचन मंत्र का जाप करना चाहिए इससे काफी फायदा होगा. संकष्टी चतुर्थी के एक दिन पहले सूर्य का कर्क राशि में गोचर (Surya Gochar in 2022) हो रहा है. इसका आशय यह है कि 16 जुलाई को सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में विराजमान होंगे. सूर्य के कर्क राशि में गोचर से कर्क संक्रांति के शुभ दिन का निर्माण हो रहा है. इस दिन हर जातक को भगवान सूर्य की पूजा करनी चाहिए. इसके साथ ही 16 जुलाई को दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से चतुर्थी तिथि शुरू हो रही है. इसका समापन 17 जुलाई को सुबह 10 बजे होगा. इस दिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत जातकों के लिए बेहद शुभकारी है.