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प्रदोष व्रत 2021: इस प्रदोष व्रत भगवान शिव को ऐसे कीजिए प्रसन्न, पूरी होगी हर मनोकामना - Pradosh fast 2021

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है. रविवार को प्रदोष व्रत पड़ रहा है. सावन (Sawan 2021) में प्रदोष व्रत का महत्व और बढ़ जाता है. आइए जानते हैं प्रदोष व्रत मनाने की विधि और इस दौरान किए जाने क्रियाकलाप.

प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत

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Published : Aug 19, 2021, 8:15 PM IST

रायपुर:शुक्रवारको सावन का प्रदोष व्रत पड़ रहा है. सावन में आने वाले इस प्रदोष व्रत को आखेटक त्रयोदशी भी कहते हैं. उत्कल प्रांत में शिव पवित्रा रोपण के नाम से भी इसे मनाया जाता है. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग का शुभ मुहूर्त पड़ रहा है. प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त शाम 5:13 से 7:38 तक रहेगा. उत्तरा आषाढ़ नक्षत्र और मकर राशि का चंद्रमा सावन शुक्ल की प्रदोष तिथि को गौरव प्रदान कर रहा है. इस दिन नामकरण, अन्नप्राशन, दोलारोहण, नवरत्न धारण करना, लता, पौधरोपण के लिए बहुत ही शुभ माना गया है.

प्रदोष व्रत 2021


योग गुरू विनीत शर्मा ने बताया कि प्रदोष काल का समय शाम 5:13 से शाम 7:38 बजे तक विशेष मुहूर्त का है. गोधूलि बेला में प्रदोष काल का पूजन करना बहुत ही शुभ माना गया है. ऐसी मान्यता है कि इस काल में भगवान शंकर कैलाश पर्वत में नृत्य करते है. इस दिन प्रातः सुबह उठकर स्नान ध्यान करके भगवान शिव को सफेद या गुलाबी वस्त्र में पूजन करना उत्तम माना गया है. शिवालय में जाकर धतूरा, आक, शमी पत्र और बेल पत्र के माध्यम से रुद्र का अभिषेक करना चाहिए. दूध, दही, पंचामृत, गंगाजल अष्ट चंदन, गोपी चंदन, कबीर, गुलाल, सिंदूर, मल्याचल चंदन आदि से भगवान शिव बहुत प्रसन्न होते हैं. इस पर्व पर श्वेत, अक्षत, सफेद, फूल, भगवान शिव को चढ़ाए जाने पर वह भक्तों के ऊपर बहुत प्रसन्न होते हैं.

शिवभक्त इस पर्व को आखेटक त्रयोदशी के रूप में भी बनाते हैं. शुक्र प्रदोष व्रत की अपनी बड़ी महिमा है. श्रावण मास शिव उपासकों के लिए बहुत बड़ा वरदान है. यह आखेटक त्रयोदशी के पर्व के रूप में भी शिव भक्तों के द्वारा मनाया जाता है. शिव को नर्मदा कावेरी, गोदावरी, गोमती और कल्याणी आदि नदियों के जल से अभिषेक करना चाहिए. साथ ही गन्ने के रस, दूध और जल से अभिषेक करने पर शिव प्रसन्न होते हैं.यह प्रकृति में सक्रियता लाता है. शिव पार्वती प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं..

ज्योतिषाचार्य अरुणेश शर्मा ने बताया कि श्रावण शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को प्रदोष व्रत मनाया जाएगा. यह व्रत प्रकृति पूजा और शिव शिवा की पूजा के लिए मनाया जाता है. प्रदोष काल शाम का समय 5:13 से शाम 7:38 तक रहेगा. इसमें शिव-पार्वती की पूजा की जाती है. माना जाता है कि इस समय शिव पार्वती अति प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं. यह समय प्रकृति में सक्रियता लाता है और प्रकृति प्रफुल्लित रहती है. जिन लोगों को संतान की चाह है. उन्हें प्रदोष व्रत रखना चाहिए. साथ ही अच्छे जीवनसाथी की इच्छा रखने वालों को भी यह व्रत करना शुभ फलदाई होता है.

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