रायपुर:छत्तीसगढ़ मेंअनलॉक-5 में जहां जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट आई है. वहीं अभी भी रायपुर से चलने वाली बसों का संचालन पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है. अभी भी प्रदेश में सिर्फ 35 प्रतिशत बसें ही चल रही हैं. अनलॉक में 1 सितंबर से बसों का संचालन शुरू हुआ था. प्रदेश में शुरुआती दिनों में सिर्फ 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत बसें ही सभी रूटों पर चलनी शुरू हुई. वहीं बस संचालकों को उम्मीद थी कि त्योहारी सीजन आने पर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी. लेकिन त्योहार में बस संचालकों को निराशा हाथ लगी है. बिना सवारी बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं. कम यात्रियों के चलते अभी 35 से 40 प्रतिशत बसें ही रायपुर से सभी रूटों पर चल रही हैं.
- रायपुर से जगदलपुर कोविड-19 के पहले 75 - अभी 20 बसें चल रही हैं.
- रायपुर से अंबिकापुर कोविड-19 के पहले 25 - अभी 10 बसें चल रही हैं.
- रायपुर से संबलपुर कोविड-19 के पहले 20 - अभी 5 बसें चल रही हैं.
- रायपुर से सराईपाली कोविड-19 के पहले 70- अभी 20 बसें चल रही हैं.
- रायपुर से बिलासपुर कोविड-19 के पहले 60- अभी 22 बसें चल रही हैं.
- रायपुर से सरसींवा कोविड-19 के पहले15- अभी 12 बसें चल रही हैं.
- रायपुर से धमतरी कोविड-19 के पहले 100- अभी 10 बसें चल रही हैं.
- रायपुर से कवर्धा कोविड-19 के पहले 60- अभी बसें चल रही हैं.
- रायपुर से बलोदा बाजार कोविड-19 के पहले 85- अभी 17 बसें चल रही हैं.
- रायपुर से महासुमन्द्र कोविड-19 के पहले 60 - अभी 8 बसें चल रही हैं.
कोरोना और लॉकडाउन ने बिगाड़ी बस सेवा की स्थिति
मार्च में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार ने 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई थी, जिसके बाद ट्रेन, बस, फ्लाइट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई थी. उसके बाद 12 मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेन, 25 मई से फ्लाइट सेवा शुरू की गई, अनलॉक में जारी निर्देशों पर प्रदेश में बस सेवा 1 सितंबर से शुरू की गई, जिसके बाद यात्री न मिलने से परेशान बस संचालकों ने रूटों पर कम बस चलाने लगे हैं. त्योहारी सीजन आने के बाद भी अभी स्थिति पहले की तरह सामान्य नहीं हो पाई हैं.
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यात्री नहीं मिलने से बस संचालक परेशान
त्योहारी सीजन शुरू होने के बावजूद सभी रूटों पर लगभग 25 से 30 परसेंट बसे ही संचालित हो रही है. इसका प्रमुख कारण यात्री नहीं मिलना भी है. कोविड-19 संक्रमण के नियमों का पालन करते हुए बस संचालक बसें तो चला रहे हैं, लेकिन यात्रियों के नहीं मिलने के कारण उनका डीजल खर्च तक नहीं निकल पा रहा है. इस कारण से आधे से ज्यादा बसें बस डिपो पर ही खड़ी हैं. प्रदेश में करीब 3 हजार बसें चलती हैं, जिसमें से फिलहाल 35 से 40 प्रतिशत बसें ही चल रही हैं. मतलब प्रदेश में 1 हजार से 1200 बसें ही चल रही हैं. इसमें भी ज्यादाकर बसें लंबी दूरी की हैं. आसपास के जिलों में बसों को चलाना मुश्किल होता जा रहा है.