कोरबा: छत बाई के पति की करीब एक साल पहले सांस बीमारी की वजह से मौत हो गई थी. छतबाई पर गरीबी ऐसे कहर बनकर टूटी कि उसके पास अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे नहीं थे. ऐसे हालात में उसे महज 1800 रुपये में अपना राशन कार्ड गिरवी रखना पड़ा. वहीं मामले में गांव के सरपंच का कहना है कि उनकी ओर से तो नाम भेज दिया गया है, लेकिन ऊपर से लिस्ट में एंट्री नहीं हुई है.
पति के अंतिम संस्कार के लिए गिरवी रखा राशन कार्ड, दर्द से भरी है छत बाई की कहानी - रमन सिंह
कोरबा में रहने वाली छत बाई को पति के अंतिम संस्कार के लिए राशन कार्ड तक गिरवी रखने पर मजबूर होना पड़ा.
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छत बाई को वापस दिलाया राशन कार्ड
छत बाई ने राशन कार्ड गिरवी रखकर पति का अंतिम संस्कार कराया है, इस बात की जानकारी जब सोशल नेटवर्किंग एप के जरिए सामाजिक कार्यकर्ता मनीष अग्रवाल को लगी तो वो खुद ही उसके गांव पहुंचे और देनदार को 1800 रुपये वापस देकर राशन कार्ड छतबाई को वापस दिलाया.
आर्थिक स्थिति है बेहद खराब
बता दें कि छतबाई को एक बेटी और एक बेटा है. गरीबी की वजह से बेटी नानी के घर रहकर पढ़ाई करती है. हालत कितनी दयनीय है इसका अंदाजा आप छत पाई के मासूम बेटे को देखकर खुद ही लगा सकते हैं. एक ओर सरकारें आवाम की भलाई का ढिंढोरा पीटती हैं, वहीं दूसरी ओर छतबाई जैसे लोगों को महज अंतिम संस्कार के लिए राशन कार्ड तक गिरवी रखना पड़ता है. ऐसे में आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाएं धरातल में कितनी कारगर साबित हो रही हैं.