जगदलपुर:बस्तर में धर्म परिवर्तन को लेकर लंबे वक्त से विवाद चला आ रहा है. इस बार धर्म परिवर्तन का विवाद नहीं बल्कि ईसाई समुदाय के कब्रिस्तान को लेकर विवाद शुरु हो गया है. गांव के लोगों का कहना है कि मिचनार में जो कब्रिस्तान बना है उसमें शवों को नहीं दफनाया जाए. ईसाई समुदाय के लोग मिचनार में बने नए कब्रिस्तान में शवों को कुछ दिनों से दफना रहे हैं. गांववाले अब इसी बात का विरोध कर रहे हैं.
बस्तर में धर्म परिवर्तन के बाद अब कब्रिस्तान पर हुआ विवाद - बस्तर में धर्म परिवर्तन
Christian cemetery बस्तर में धर्म परिवर्तन सालों से बड़ा मुद्दा रहा है. अब बस्तर में ईसाई कब्रिस्तान को लेकर भी विवाद शुरु हो गया है. मिचनार में बने ईसाई समुदाय के कब्रिस्तान का विरोध गांव वाले करने लगे हैं.Villagers sitting on strike against cemetery

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : Jan 9, 2024, 4:59 PM IST
|Updated : Jan 9, 2024, 8:48 PM IST
विवाद के पीछे क्या है वजह?: दरअसल ईसाई समुदाय में शवों को दफनाने की व्यवस्था है. शवों को दफनाए जाने के विरोध बस्तर में सालों से ग्रामीण करते आए हैं. इस बार भी विवाद के पीछे यहीं मुद्दा है. लगातार बढ़ रहे विवाद के बाद प्रशासन ने ईसाई समुदाय के लिए मिचनार में एक जमीन कब्रिस्तान के लिए मुहैया कराई थी. प्रशासन की ओर से कहा गया था कि शवों को कहीं और नहीं दफनाकर यहीं पर लाया जाए. अब मिचनार में दफनाए जा रहे ईसाई समुदाय के शवों को लेकर ग्रामीणों ने विरोध शुरु कर दिया है. गांव वाले नहीं चाहते हैं कि मिचनार में शवों को दफनाने का काम हो.
कब्रिस्तान के विरोध में धरने पर बैठे गांववाले: लोहंडीगुड़ा ब्लॉक के मिचनार गांव में शवों को दफनाए जाने से नाराज चार गांव के लोग धरने पर बैठ गए हैं. जिला प्रशासन की टीम को जैसे ही ग्रामीणों के धरने की जानकारी मिली उसके हाथ पैर फूल गए. प्रशासन की टीम अब गांव वालों का धरना खत्म कराने की कोशिश कर रही है. प्रशासन लगातार गांव वालों से बात कर रही है लेकिन गांव वाले धरने पर उठने का नाम नहीं ले रहे हैं. प्रशासन जहां धरना खत्म कराने पर अड़ा है वहीं गांव वाले ठोस आश्वासन के बाद ही हटने की बात कह रहे हैं.