बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर के सरकारी अस्पताल में हुई बिजली बंद होने से बच्चो की मौत की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है. अम्बिकापुर की घटना जैसे ही बिलासपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी आगजनी की घटना ने 5 शिशुओं की जान ले ली थी. Arrangement of Bilaspur cims is better than before
बिलासपुर सिम्स में हुई थी कभी बच्चों की मौत, जानिए कितनी बदली व्यवस्था कब हुई थी घटना :22 जनवरी 2019 को सिम्स मेडिकल कॉलेज (cims Medical College)के एनआईसीयू की बिजली के तारों में शार्ट सर्किट हुआ था. शार्ट सर्किट की वजह से वॉर्ड में धुंआ भर गया और अफरा तफरी मच गई थी. जिस समय यह हादसा हुआ उस समय एनआईसीयू में एक दर्जन से ज्यादा बच्चे भर्ती थे. आग लगने के दौरान आनन फानन में बच्चों को बाहर निकाला गया . इस घटना में 4 शिशुओं की मौत हो गई थी और बाद में एक और शिशु ने दम तोड़ा. डॉक्टरों ने पहले कहा था कि बच्चों की मौत दम घुटने से नहीं हुई, लेकिन पीएम रिपोर्ट में बच्चों की मौत की वजह दम घुटने से बताई गई. सिम्स प्रबंधन अब भी यह मानने को राजी नहीं है कि बच्चों की मौत दम घुटने से हुई थी. लिहाजा सिम्स प्रबंधन जांच के लिए पीएम रिपोर्ट मेकाहारा रायपुर भेजा था. घटना के बाद हरकत में आई थी सरकार :22 जनवरी को सिम्स अस्पताल में आगजनी की घटना हुई थी. इसके बाद आनन-फानन में सिम्स प्रबंधन ने एनआईसीयू वार्ड में भर्ती सभी बच्चों को नजदीकी निजी अस्पतालों में भर्ती कराया था. इस मामले में उस समय जांच के बाद कार्रवाई की बात कही गई थी.कुछ जिम्मेदारों पर गाज भी गिरी थी.
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अब कैसी है सिम्स की स्थिति :इस समय अम्बिकापुर की घटना को लेकर जहां प्रदेश में हाय तौबा मची है. वहीं बिलासपुर के सिम्स मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने दावा किया है कि पिछली बार की व्यवस्थाओं से ज्यादा व्यवस्था अस्पताल में की गई है. एनआईसीयू के लिए अलग से जनरेटर की व्यवस्था है. बिजली बंद होने पर जनरेटर से सप्लाई दी जाती है.